इथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी को लेकर देश में जारी राजनीतिक बहस के बीच भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा के बयान पर विवाद खड़ा हो गया है। मध्य प्रदेश के रीवा से लोकसभा सांसद मिश्रा ने केंद्र सरकार की इथेनॉल नीति का बचाव करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल किया कि अगर शुद्ध पेट्रोल चाहिए तो वह आखिर आएगा कहां से?
‘शुद्ध पेट्रोल कहां से आएगा?’
जनार्दन मिश्रा ने रविवार को रीवा से भोपाल और कोलकाता के लिए नई उड़ान सेवाओं के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने इथेनॉल ब्लेंडिंग का विरोध करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में एक अभियान चल रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि इथेनॉल काम नहीं करेगा और केवल शुद्ध पेट्रोल ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
मिश्रा ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर देश में शुद्ध पेट्रोल उपलब्ध नहीं है, तो इसकी आपूर्ति कहां से होगी? उन्होंने इसी संदर्भ में विपक्ष से तीखे अंदाज में पूछा कि क्या शुद्ध पेट्रोल उनके पिता के घर से आएगा?
कच्चे तेल के आयात का दिया हवाला
भाजपा सांसद ने इथेनॉल नीति का बचाव करते हुए भारत की कच्चे तेल की आयात पर निर्भरता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी जरूरत का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल ही पैदा करता है, जबकि लगभग 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करना पड़ता है।
उन्होंने वैश्विक स्तर पर जारी उथल-पुथल और अमेरिका-ईरान संघर्ष का हवाला देते हुए कहा कि ऊर्जा आपूर्ति को लेकर दुनिया में लगातार चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में पेट्रोलियम ईंधन के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करना जरूरी है।
‘इथेनॉल से चल सकती हैं गाड़ियां’
जनार्दन मिश्रा ने दावा किया कि भारत में वाहन इथेनॉल ब्लेंडिंग वाले ईंधन पर चल सकते हैं। उन्होंने ब्राजील का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बड़ी मात्रा में इथेनॉल का उत्पादन होता है और वाहन 100 प्रतिशत इथेनॉल पर भी चलाए जाते हैं।
उन्होंने सवाल किया कि अगर इथेनॉल का उत्पादन नहीं होगा तो पेट्रोल और डीजल की जरूरत कैसे पूरी होगी। मिश्रा के मुताबिक, इथेनॉल का उत्पादन बढ़ाने से देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
इथेनॉल नीति पर कांग्रेस लगातार हमलावर
केंद्र सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठाती रही है। विपक्ष का आरोप है कि इस नीति का फायदा मुख्य रूप से इथेनॉल उत्पादकों को हो रहा है और आम उपभोक्ताओं के पास ईंधन चुनने का विकल्प सीमित हो रहा है।
कांग्रेस की ओर से E20 पेट्रोल को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। पार्टी का कहना है कि सरकार को उपभोक्ताओं की चिंताओं और वाहनों के प्रदर्शन से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
सरकार ने E20 पेट्रोल का किया बचाव
वहीं, केंद्र सरकार पहले भी E20 पेट्रोल का बचाव कर चुकी है। सरकार का कहना है कि ऐसा कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है, जिससे यह साबित हो कि E20 ईंधन के इस्तेमाल से इंजन में असामान्य टूट-फूट, जंग या वाहन की उम्र कम होने जैसी समस्याएं होती हैं।
संसद में दिए गए एक लिखित जवाब में सरकार ने E20 ईंधन के कई फायदे भी गिनाए थे। सरकार के मुताबिक, इसमें अधिक ऑक्टेन और बेहतर एंटी-नॉक प्रदर्शन होता है। इसके अलावा बेहतर दहन, स्मूद एक्सेलरेशन और कम उत्सर्जन जैसे फायदे भी बताए गए हैं।
कांग्रेस ने BJP सांसद के बयान पर किया पलटवार
भाजपा सांसद के बयान पर कांग्रेस ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने पलटवार करते हुए कहा कि न तो उन्होंने और न ही उनके पिता ने कभी यह वादा किया था कि उनकी सरकार आने पर पेट्रोल 35 रुपये प्रति लीटर मिलेगा।
उन्होंने केंद्र सरकार पर पेट्रोल के नाम पर जनता को कथित तौर पर लूटने का आरोप लगाया। तिवारी ने भाजपा सांसद के बयान पर तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों ने ऐसे वादे किए थे, उनसे ही शुद्ध पेट्रोल के बारे में सवाल किया जाना चाहिए।
इथेनॉल पर सियासी घमासान जारी
इथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बहस लगातार तेज होती जा रही है। सरकार जहां इसे ऊर्जा सुरक्षा, आयात पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम बता रही है, वहीं विपक्ष उपभोक्ताओं की पसंद, वाहन प्रदर्शन और पेट्रोल की कीमतों को लेकर सवाल उठा रहा है।
ऐसे में भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा की टिप्पणी ने इस मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।







