National Thoughts Logo
National Thoughts
AWebPortalOfPositiveJournalism

पैलेट गन विवाद के बीच CRPF DG का जवानों को संदेश

a
admin
30 जुलाई 2026 को 06:21 am बजे
Featured Image

पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह का बयान चर्चा में है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जवान नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत अपना कर्तव्य निभाते हैं, तो उनके हर वैधानिक निर्णय की जिम्मेदारी वह स्वयं लेने को तैयार हैं। इस बयान को सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

पैलेट गन विवाद के बीच आया DG का बयान

संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सवाल उठा रहा है। इसी बीच CRPF महानिदेशक का यह बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने जवानों से बिना किसी डर के अपने कर्तव्य का पालन करने का आह्वान किया।

उनका कहना था कि यदि ड्यूटी के दौरान कानून और नियमों के अनुसार कोई कार्रवाई की जाती है, तो उसकी जवाबदेही वह स्वयं महानिदेशक के रूप में स्वीकार करेंगे।

अलंकरण समारोह में जवानों का बढ़ाया मनोबल

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के अलंकरण समारोह में जवानों को संबोधित करते हुए ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि चाहे अभियान संबंधी टुकड़ी हो या कानून-व्यवस्था संभालने वाली इकाई, सभी जवान पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाएं।

उन्होंने कहा कि यदि ड्यूटी के दौरान कोई वैधानिक निर्णय लिया जाता है, तो उसके लिए जवानों को डरने की जरूरत नहीं है। नेतृत्व हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा रहेगा।

लोकतंत्र में विरोध का अधिकार, लेकिन कानून सर्वोपरि

लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन जब प्रदर्शन हिंसक हो जाए, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने लगे या सुरक्षा बलों पर हमला करने की स्थिति उत्पन्न हो, तब कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य और सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी बन जाती है।

ऐसे मामलों में सुरक्षा बलों को कानून के अनुरूप कार्रवाई करनी होती है ताकि शांति और व्यवस्था बनी रहे।

संसद मार्च के बाद हुई थी आंतरिक समीक्षा

20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई कार्रवाई के बाद त्वरित कार्य बल (RAF) की भूमिका की आंतरिक समीक्षा भी की गई थी।

समीक्षा में कुछ सुधारात्मक सुझाव दिए गए, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे—

तैनाती से पहले जवानों को बेहतर ब्रीफिंग दी जाए।

हाल ही में विशेष अभियान क्षेत्रों से लौटे जवानों को तुरंत भीड़ नियंत्रण में न लगाया जाए।

कानून-व्यवस्था से जुड़े अभियानों के लिए विशेष प्रशिक्षण और समन्वय को और मजबूत किया जाए।

बल प्रयोग हमेशा आवश्यकता, संतुलन और संवेदनशीलता के साथ किया जाए।

जांच में SOP के पालन की बात

CRPF की आंतरिक जांच में यह निष्कर्ष सामने आया कि कार्रवाई के दौरान निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन किया गया।

जांच के अनुसार—

सबसे पहले प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी गई।

इसके बाद आंसू गैस और लाठीचार्ज जैसे कम स्तर के उपाय अपनाए गए।

जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिखाई दी, तब आवश्यक अनुमति मिलने के बाद पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया।

जांच में यह भी कहा गया कि संबंधित सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के बाद ही आगे की कार्रवाई की गई।

कानूनी प्रक्रिया भी स्पष्ट

नियमों के अनुसार यदि ड्यूटी के दौरान किसी जवान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की स्थिति बनती है, तो अभियोजन की प्रक्रिया संबंधित वैधानिक प्रावधानों के अनुसार ही आगे बढ़ती है।

ऐसे मामलों में यह भी देखा जाता है कि कार्रवाई अधिकृत आदेशों और ड्यूटी के दौरान निर्धारित नियमों के अनुरूप की गई थी या नहीं।

सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाने वाला संदेश

ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह का बयान ऐसे समय आया है जब सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर लगातार राजनीतिक बहस जारी है। उनका संदेश स्पष्ट था कि यदि जवान नियमों और कानून के दायरे में रहकर अपना कर्तव्य निभाते हैं, तो नेतृत्व उनके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।

यह पूरा घटनाक्रम एक ओर सुरक्षा बलों की कार्यप्रणाली की समीक्षा और सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करता है, तो दूसरी ओर यह भी बताता है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान सुरक्षा एजेंसियों का मनोबल बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध का अधिकार सुरक्षित है, लेकिन उसकी सीमा कानून के दायरे तक ही मानी जाती है। जब स्थिति सार्वजनिक सुरक्षा और व्यवस्था को प्रभावित करने लगे, तब कानून के अनुरूप कार्रवाई करना सुरक्षा बलों का संवैधानिक दायित्व होता है।