Delimitation Bill 2026: संसद में प्रस्तावित परिसीमन संशोधन विधेयक को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने संकेत दिए हैं कि वह केंद्र सरकार के इस विधेयक का समर्थन कर सकती है, लेकिन इसके लिए उसने तीन अहम शर्तें रखी हैं। यदि इन शर्तों पर सहमति बनती है तो लोकसभा में विधेयक के पक्ष में संख्या बल बढ़ सकता है।
DMK की पहली शर्त: 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों की सीमा बनी रहे
पार्टी सूत्रों के अनुसार, DMK चाहती है कि 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या पर लगी रोक, जो वर्ष 2027 में समाप्त होने वाली है, उसे संविधान संशोधन के जरिए 25 वर्ष के लिए और बढ़ाया जाए।
पार्टी का मानना है कि इससे जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों के हित सुरक्षित रहेंगे।
दूसरी शर्त: सभी राज्यों में 50% सीटों की समान बढ़ोतरी
DMK की दूसरी मांग है कि लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी सभी राज्यों के लिए एक समान 50 प्रतिशत हो।
पार्टी का दावा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अप्रैल में विधेयक पेश करते समय इस दिशा में मौखिक आश्वासन दिया था।
तीसरी शर्त: नए निर्वाचन क्षेत्रों की पूरी सूची जारी हो
DMK चाहती है कि सरकार केवल कानून पारित न करे, बल्कि इसके साथ ही देशभर के नए लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों का विस्तृत खाका और सूची भी सार्वजनिक करे, ताकि राज्यों के बीच किसी तरह की असमानता या भ्रम की स्थिति न रहे।
शर्तें मानने पर समर्थन देने को तैयार DMK
सूत्रों के मुताबिक, यदि केंद्र सरकार इन तीनों मांगों को स्वीकार करती है तो DMK परिसीमन विधेयक का समर्थन करने पर विचार कर सकती है।
हालांकि, पार्टी ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय विधेयक के अंतिम मसौदे और उसके सभी प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद ही लिया जाएगा।
अब तक बिल का विरोध करती रही है DMK
DMK अब तक इस विधेयक का खुलकर विरोध करती रही है। पार्टी का आरोप रहा है कि परिसीमन से दक्षिण भारत के राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है।
हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और बदले समीकरणों के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि पार्टी अब अपने रुख में बदलाव कर सकती है।
लोकसभा में बहुमत का गणित क्या कहता है?
केंद्र सरकार इस विधेयक को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश में है।
प्रस्तावित कानून के तहत लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव है, जिससे महिला आरक्षण कानून को लागू करने का रास्ता साफ हो सके।
जब यह विधेयक पहली बार अप्रैल में पेश किया गया था, तब इसे 298 सांसदों का समर्थन मिला था।
NDA के पास कितनी ताकत?
वर्तमान में लोकसभा में NDA के पास 319 सांसदों का समर्थन है।
यदि DMK के 22 सांसद विधेयक के पक्ष में मतदान करते हैं, तो यह संख्या बढ़कर 341 हो जाएगी।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि NCP (SP) के आठ सांसद भी समर्थन दे सकते हैं। यदि ऐसा होता है और YSRCP तथा ZPM दोबारा समर्थन देते हैं, तो सरकार का आंकड़ा 354 सांसदों तक पहुंच सकता है।
हालांकि, यदि सदन में सभी 540 सदस्य मतदान में हिस्सा लेते हैं, तो दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 वोट आवश्यक होंगे।
क्या विशेष सत्र बुलाएगी सरकार?
पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा थी कि केंद्र सरकार 16 से 18 अगस्त के बीच परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयकों पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुला सकती है।
हालांकि, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इन अटकलों को खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल 16 से 18 अगस्त के बीच किसी विशेष सत्र का प्रस्ताव नहीं है।
क्यों अहम है परिसीमन विधेयक?
परिसीमन संशोधन विधेयक केवल लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध महिला आरक्षण, राज्यों के प्रतिनिधित्व और भविष्य की चुनावी राजनीति से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस विधेयक पर सरकार और विपक्ष के बीच व्यापक राजनीतिक मंथन देखने को मिल सकता है।







