FCRA Amendment Bill 2026: विवादित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA Amendment Bill) पर संसद में 12 अगस्त को चर्चा शुरू होने की संभावना है। केंद्र सरकार इस विधेयक को पारित कराने के साथ-साथ मॉनसून सत्र में जारी संसदीय गतिरोध समाप्त करने के लिए विपक्षी दलों से लगातार संवाद कर रही है।
इसी बीच मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर प्रस्तावित कानून को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं। बैठक के बाद उन्होंने बताया कि गृह मंत्री ने आश्वासन दिया है कि यह कानून पिछली तारीख (रेट्रोस्पेक्टिव प्रभाव) से लागू नहीं किया जाएगा।
12 अगस्त को संसद में होगी FCRA बिल पर चर्चा
लालदुहोमा ने मिजोरम के चर्च नेताओं के प्रतिनिधिमंडल के साथ गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने प्रस्तावित FCRA संशोधन विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर अपनी आपत्तियां और सुझाव रखे।
संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए लालदुहोमा ने कहा कि गृह मंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि कानून को पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने संकेत दिया है कि 12 अगस्त को संसद में इस विधेयक पर चर्चा होगी।
गौरतलब है कि यह विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था।
चर्च संगठनों ने क्या जताई चिंता?
गृह मंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में लालदुहोमा, मिजोरम कोहरान ह्रुइतु कमिटी (MKHC) के चेयरमैन जॉन राल्डोसांगा और काउंसिल ऑफ चर्चेस इन मिजोरम (CCM) के महासचिव लालहमांगाइहा ने मांग की कि नया कानून केवल भविष्य के मामलों पर लागू किया जाए।
प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि यदि कानून को पिछली तारीख से लागू किया गया तो कानूनी अनिश्चितता पैदा होगी और कई संस्थाओं को पुराने प्रक्रियागत मामलों के लिए भी दंड का सामना करना पड़ सकता है।
FCRA संशोधन विधेयक में क्या है प्रस्ताव?
प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य विदेशी अंशदान और उससे अर्जित संपत्तियों की निगरानी, प्रबंधन और निपटान के लिए एक सशक्त कानूनी व्यवस्था तैयार करना है।
विधेयक के अनुसार—
जिस संस्था का FCRA पंजीकरण रद्द, समाप्त या स्वेच्छा से सरेंडर हो जाएगा, उसकी विदेशी फंडिंग और उससे निर्मित संपत्तियां अस्थायी रूप से सरकार द्वारा नामित प्राधिकरण के नियंत्रण में चली जाएंगी।
यदि संस्था निर्धारित समय के भीतर दोबारा पंजीकरण या लाइसेंस बहाल नहीं करा पाती, तो उसकी विदेशी निधि और संबंधित संपत्तियां स्थायी रूप से उसी प्राधिकरण को हस्तांतरित कर दी जाएंगी।
सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य विदेशी फंड के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।
संसदीय गतिरोध खत्म करने में जुटी सरकार
मॉनसून सत्र के दौरान संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने के लिए केंद्र सरकार विपक्ष के साथ लगातार संवाद कर रही है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से फोन पर बातचीत की और पिछले कुछ दिनों में उनसे कई बार मुलाकात भी की। दोनों नेताओं के बीच संसद के कामकाज और महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा हुई।
रिजिजू बोले- राजनीतिक विरोधी हैं, दुश्मन नहीं
पत्रकारों से बातचीत में किरेन रिजिजू ने कहा कि राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर राजनीतिक दलों को मिलकर काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा,”हम राजनीतिक विरोधी हो सकते हैं, लेकिन दुश्मन नहीं हैं। राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है और संसद का सुचारू रूप से चलना सभी की जिम्मेदारी है।”
रिजिजू ने यह भी कहा कि सरकार कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों के साथ संवाद बनाए रखने की इच्छुक है।
राहुल गांधी ने रखी सर्वदलीय बैठक की मांग
सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने सरकार से प्रस्तावित विधेयकों पर आगे बढ़ने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग दोहराई। हालांकि, सरकार की ओर से फिलहाल ऐसी बैठक बुलाने का कोई औपचारिक आश्वासन नहीं दिया गया है।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर भी चल रही चर्चा
सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन पर भी राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने का प्रयास कर रही है।
प्रस्तावित संशोधन के तहत 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया के जरिए लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 किए जाने का प्रस्ताव है। सरकार का मानना है कि इससे 2029 के आम चुनावों से पहले संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
गृह मंत्री की संसद में मौजूदगी पर सरकार का जवाब
विपक्ष द्वारा गृह मंत्री अमित शाह की संसद में मौजूदगी को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर किरेन रिजिजू ने कहा कि अमित शाह नियमित रूप से सदन में उपस्थित रहते हैं और जब भी उनके मंत्रालय से संबंधित किसी विधेयक पर चर्चा होती है, वे स्वयं सदन में मौजूद रहते हैं।
सरकार का कहना है कि वह सभी प्रमुख विधेयकों पर व्यापक चर्चा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ना चाहती है।







