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PM मोदी वीडियो विवाद: Meta को Safe Harbour पर चेतावनी, संविधान पालन का निर्देश

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admin
05 अगस्त 2026 को 06:43 am बजे
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फेसबुक पोस्ट को कुछ समय के लिए रोके जाने, AI-जनरेटेड आपत्तिजनक सामग्री और बच्चों व महिलाओं से जुड़े संवेदनशील कंटेंट को लेकर केंद्र सरकार ने टेक कंपनी Meta के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि कंपनी भारतीय कानूनों का पालन नहीं करती है, तो उसे आईटी एक्ट के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) सुरक्षा से वंचित किया जा सकता है।

इसी मामले में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मेटा के शीर्ष वैश्विक अधिकारियों को तलब किया है। कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी 5 और 6 अगस्त को केंद्र सरकार के साथ अहम बैठक करेंगे।

क्या है पूरा मामला?

विवाद उस समय शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक फेसबुक पोस्ट, जिसमें उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए पेपर लीक के खिलाफ सरकार के संकल्प का उल्लेख किया था, कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म पर दिखाई नहीं दी।

बाद में Meta ने इसे AI आधारित तकनीकी त्रुटि बताया, माफी मांगी और पोस्ट को बहाल कर दिया। हालांकि केंद्र सरकार ने इस स्पष्टीकरण को पर्याप्त नहीं माना और कंपनी से अपने ऑटोमेटेड मॉडरेशन सिस्टम को मजबूत करने को कहा।

संसदीय समिति की दो टूक चेतावनी

संसदीय समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि कोई सोशल मीडिया कंपनी भारतीय कानूनों और संविधान का पालन नहीं करती है, तो उसे आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा नहीं मिलेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों को भारत के संविधान और कानूनों का पूर्ण पालन करना होगा।

‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा क्या है?

आईटी एक्ट के तहत मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा सोशल मीडिया कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किए गए यूजर कंटेंट के लिए सीमित कानूनी संरक्षण प्रदान करती है।

हालांकि यदि कोई प्लेटफॉर्म कानूनों का पालन करने में विफल रहता है या निर्धारित नियमों का उल्लंघन करता है, तो यह कानूनी सुरक्षा वापस ली जा सकती है।

सरकार-मेटा बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

5 और 6 अगस्त को होने वाली बैठक में केंद्र सरकार Meta से कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब मांगेगी, जिनमें शामिल हैं—

AI आधारित कंटेंट मॉडरेशन

एल्गोरिदम में संभावित भेदभाव (Algorithmic Bias)

बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट (CSAM) पर कार्रवाई

महिलाओं और बच्चों से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री

वेरिफाइड अकाउंट्स की सुरक्षा व्यवस्था

राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलू

सरकार यह भी जानना चाहती है कि Meta के मौजूदा सिस्टम इन चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटने में क्यों सफल नहीं हो रहे हैं।

Meta से मांगा जाएगा जवाब

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, बैठक केवल तकनीकी मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम, कंटेंट मॉडरेशन की प्रक्रिया और भारतीय कानूनों के अनुपालन पर भी विस्तार से चर्चा होगी।

सरकार Meta से यह स्पष्ट करने को कहेगी कि AI-जनरेटेड कंटेंट, फर्जी सामग्री और संवेदनशील पोस्ट के मामलों में उसकी निगरानी प्रणाली कैसे काम करती है।

संसदीय समिति ने उठाए गंभीर सवाल

हाल ही में संसदीय समिति ने Meta अधिकारियों से प्लेटफॉर्म पर मौजूद अश्लील सामग्री, बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट (CSAM) और कंटेंट मॉडरेशन को लेकर सवाल पूछे थे।

समिति ने आरोप लगाया कि कई मामलों में वैध कंटेंट हटाया जा रहा है, जबकि आपत्तिजनक सामग्री समय पर नहीं हटाई जा रही।

Instagram पर CSAM विज्ञापनों की भी जांच

Meta के स्वामित्व वाले Instagram पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कथित पेड विज्ञापनों (CSAM) को लेकर भी कंपनी जांच के दायरे में है।

इस मामले में केंद्र सरकार पहले ही कंपनी को नोटिस जारी कर चुकी है और उससे जवाब मांगा गया है।

Meta ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री मोदी की पोस्ट हटने के विवाद के बाद Meta ने सरकार को बताया कि यह एक तकनीकी त्रुटि थी।

कंपनी ने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में प्रधानमंत्री और अन्य प्रमुख वेरिफाइड अकाउंट्स की पोस्ट पर अतिरिक्त निगरानी रखी जाएगी और किसी भी मॉडरेशन कार्रवाई से पहले वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा बहुस्तरीय समीक्षा की जाएगी।

सरकार का स्पष्ट संदेश

केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि भारत में काम करने वाले सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारतीय संविधान, आईटी कानून और नियामकीय नियमों का पूरी तरह पालन करना होगा।

सरकार का कहना है कि यदि कोई कंपनी नियमों का उल्लंघन करती है या कंटेंट मॉडरेशन में गंभीर लापरवाही बरतती है, तो उसके खिलाफ आईटी कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें सेफ हार्बर सुरक्षा वापस लेने जैसे कदम भी शामिल हैं।