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RBI की चेतावनी: अल नीनो से महंगाई और GDP पर बड़ा खतरा

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admin
05 अगस्त 2026 को 06:32 am बजे
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी ताजा मौद्रिक नीति समीक्षा (MPC) में रेपो रेट को यथावत रखने का फैसला किया है। हालांकि, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ किया कि इस समय भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने सबसे बड़ा जोखिम अल नीनो (El Niño) और मानसून की अनिश्चितता है।

केंद्रीय बैंक का मानना है कि यदि दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य नहीं रहा और अल नीनो का प्रभाव बढ़ा, तो इसका सीधा असर खाद्य महंगाई (Food Inflation), कृषि उत्पादन और GDP ग्रोथ पर पड़ सकता है। यही वजह है कि RBI ने फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया और आगे के फैसले से पहले महंगाई व मानसून की स्थिति पर नजर बनाए रखने का संकेत दिया है।

रेपो रेट में बदलाव क्यों नहीं किया गया?

मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक और घरेलू दोनों स्तरों पर कई तरह की अनिश्चितताएं बनी हुई हैं।

उन्होंने बताया कि—

दक्षिण-पश्चिम मानसून की स्थिति

अल नीनो का प्रभाव

भू-राजनीतिक तनाव

वैश्विक व्यापार नीतियों में बदलाव

जैसे कारक भविष्य की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए RBI ने फिलहाल “वेट एंड वॉच” की रणनीति अपनाई है।

अल नीनो RBI की चिंता क्यों बढ़ा रहा है?

अल नीनो एक वैश्विक मौसमीय घटना है, जिसकी वजह से भारत में सामान्य से कम या असमान बारिश होने की संभावना बढ़ जाती है।

यदि मानसून कमजोर रहता है तो—

कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

सब्जियां, दालें और अनाज की आपूर्ति घट सकती है।

खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी आ सकती है।

महंगाई पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।

इसी वजह से RBI मौसम संबंधी जोखिमों को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहा है।

महंगाई पर क्या पड़ सकता है असर?

आरबीआई ने माना कि हाल के महीनों में हेडलाइन महंगाई में बढ़ोतरी मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों के कारण हुई है।

गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार फिलहाल महंगाई का दबाव व्यापक अर्थव्यवस्था में नहीं फैला है, लेकिन यदि खाद्य और ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती रही तो इसका असर अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।

यही कारण है कि केंद्रीय बैंक महंगाई के हर संकेत पर बारीकी से नजर रख रहा है।

GDP ग्रोथ को लेकर RBI का भरोसा बरकरार

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद RBI ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बताया है।

केंद्रीय बैंक के अनुसार—

घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लगातार विस्तार हो रहा है।

सेवा क्षेत्र (Services) अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।

निर्यात (Exports) से भी अर्थव्यवस्था को समर्थन मिल रहा है।

इन्हीं कारणों से भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है।

खेती पर मंडरा रहा है जोखिम

RBI ने चेतावनी दी कि यदि मानसून सामान्य से कमजोर या असमान रहता है तो कृषि क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है।

हालांकि, केंद्रीय बैंक का मानना है कि—

जलाशयों में पर्याप्त जल स्तर,

फसल विविधीकरण,

जलवायु-अनुकूल खेती,

जल संरक्षण जैसी सरकारी पहल

इस जोखिम को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकती हैं।

ब्याज दरों पर जल्दबाजी नहीं करेगा RBI

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक जल्दबाजी में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।

उन्होंने कहा कि आगे किसी भी नीतिगत फैसले से पहले RBI यह देखना चाहता है कि—

महंगाई किस दिशा में बढ़ती है।

खाद्य कीमतों का दबाव कितना रहता है।

आर्थिक विकास की रफ्तार कैसी बनी रहती है।

इसके बाद ही भविष्य में रेपो रेट को लेकर निर्णय लिया जाएगा।

महंगाई का नया अनुमान क्या है?

RBI के अनुसार—

चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3) में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है।

इसकी मुख्य वजह खाद्य और ईंधन की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी होगी।

हालांकि, केंद्रीय बैंक का मानना है कि यह दबाव फिलहाल मांग बढ़ने के बजाय आपूर्ति (Supply Side) से जुड़े कारणों की वजह से है।

GDP और महंगाई का नया अनुमान

RBI ने पूरे वित्त वर्ष के लिए—

CPI महंगाई का अनुमान 5% रखा है।

वास्तविक GDP वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 6.7% कर दिया है।

हालांकि, केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि मौसम, कच्चे तेल की कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार से जुड़े जोखिम अभी भी बने हुए हैं।

RBI का स्पष्ट संदेश

भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है, लेकिन आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था की दिशा काफी हद तक मानसून की स्थिति और अल नीनो के प्रभाव पर निर्भर करेगी।

यदि बारिश सामान्य रहती है तो महंगाई पर दबाव कम हो सकता है, जबकि कमजोर मानसून की स्थिति में खाद्य कीमतों में तेजी और आर्थिक गतिविधियों पर असर देखने को मिल सकता है। इसलिए RBI फिलहाल सतर्क रुख अपनाते हुए हर आर्थिक संकेत पर नजर बनाए हुए है।