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RBI MPC: रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, GDP ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 6.7%

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admin
05 अगस्त 2026 को 09:01 am बजे
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट लगातार चौथी बार 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया है। आरबीआई का मानना है कि फिलहाल ऊर्जा कीमतों, भू-राजनीतिक परिस्थितियों और महंगाई के रुख पर अधिक स्पष्टता आने तक ब्याज दरों में बदलाव करना उचित नहीं होगा।

हालांकि, चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालात के बावजूद केंद्रीय बैंक ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया है। वहीं महंगाई (CPI) का अनुमान 5.1% से घटाकर 5.0% कर दिया गया है।

MPC ने सर्वसम्मति से लिया फैसला

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय लिया।

इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपना ‘तटस्थ’ (Neutral) रुख भी बरकरार रखा है। इसका मतलब है कि भविष्य में आर्थिक परिस्थितियों और महंगाई के रुख के आधार पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी या कटौती दोनों की संभावना खुली रहेगी।

एशिया के कई देशों से अलग रहा RBI का रुख

जहां इंडोनेशिया, फिलीपींस सहित एशिया के कई केंद्रीय बैंकों ने ऊर्जा कीमतों और युद्ध से बढ़ी अनिश्चितता को देखते हुए मौद्रिक नीति को सख्त किया है, वहीं RBI ने फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव से परहेज किया है।

केंद्रीय बैंक ने रुपये को स्थिर रखने और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए पहले घोषित उपायों पर भरोसा बनाए रखा है।

महंगाई को लेकर क्या कहा RBI ने?

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि निकट भविष्य में खुदरा महंगाई में कुछ बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

केंद्रीय बैंक के अनुसार—

वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही (Q3) में महंगाई अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है।

इसकी मुख्य वजह खाद्य और ईंधन की बढ़ती कीमतें होंगी।

इसके बाद महंगाई में धीरे-धीरे नरमी आने की उम्मीद है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल महंगाई का दबाव व्यापक स्तर पर नहीं फैला है और कोर इंफ्लेशन (खाद्य एवं ईंधन को छोड़कर) अभी नियंत्रण में है।

महंगाई और कोर इंफ्लेशन का नया अनुमान

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए—

CPI आधारित महंगाई का अनुमान 5.0% रखा है।

कोर इंफ्लेशन का अनुमान 4.7% से घटाकर 4.3% कर दिया है।

इससे संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक को दीर्घकाल में महंगाई नियंत्रित रहने की उम्मीद है।

GDP ग्रोथ पर RBI का भरोसा कायम

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद RBI ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बताया है।

केंद्रीय बैंक के अनुसार अर्थव्यवस्था को समर्थन मिल रहा है—

मजबूत घरेलू मांग से,

विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र की गतिविधियों से,

सेवा क्षेत्र की निरंतर वृद्धि से,

और निर्यात में मजबूती से।

इन्हीं कारणों से GDP वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत किया गया है।

किन जोखिमों पर RBI की नजर?

आरबीआई ने कहा कि भविष्य की आर्थिक स्थिति कई बाहरी कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें प्रमुख हैं—

दक्षिण-पश्चिम मानसून,

अल नीनो का प्रभाव,

पश्चिम एशिया का तनाव,

वैश्विक व्यापार नीतियां,

कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव।

इन सभी कारणों से आर्थिक परिदृश्य अभी भी अनिश्चित बना हुआ है।

घरेलू अर्थव्यवस्था को मिल रहा मजबूत समर्थन

केंद्रीय बैंक के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है।

मुख्य संकेतक बताते हैं कि—

बैंक ऋण वृद्धि करीब 18 प्रतिशत बनी हुई है।

घरेलू मांग मजबूत है।

सेवा क्षेत्र अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।

हालांकि विनिर्माण गतिविधियों में कुछ नरमी देखने को मिली है।

पश्चिम एशिया संकट पर RBI की चिंता

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते घटनाक्रम वैश्विक बाजारों और निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों का असर भारत की महंगाई और आर्थिक वृद्धि के अनुमानों पर पड़ सकता है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद इन वैश्विक झटकों से निपटने में सक्षम है।

विदेशी मुद्रा भंडार और निवेश की स्थिति

आरबीआई के अनुसार—

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 31 जुलाई तक 692.9 अरब डॉलर रहा।

सेवा निर्यात और प्रवासी भारतीयों की ओर से भेजी गई धनराशि (Remittances) से चालू खाते को मजबूती मिली है।

जून और जुलाई में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) का प्रवाह भी सकारात्मक रहा।

cप्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में भी मजबूती बनी हुई है।

सहकारी बैंकों के लिए नए कदम

आरबीआई ने सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए भी कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों की घोषणा की है।

इनमें शामिल हैं—

शहरी सहकारी बैंकों (UCB) के लाइसेंस से जुड़े नए मसौदा दिशानिर्देश।

ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए संशोधित ऋण निगरानी व्यवस्था।

बैंकों और वित्तीय संस्थानों में ब्याज दरों को अधिक पारदर्शी और मानकीकृत बनाने का प्रस्ताव।

विशेषज्ञों की राय

कोटक महिंद्रा बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज ने कहा कि रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला बाजार की उम्मीदों के अनुरूप है।

उनके अनुसार RBI ने संतुलित रुख अपनाया है और भविष्य के फैसले पूरी तरह महंगाई तथा आर्थिक आंकड़ों पर आधारित होंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि महंगाई अपेक्षा से अधिक बढ़ती है, तो वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में ब्याज दरों में 0.50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है।

अगली MPC बैठक कब होगी?

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अगली बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 के बीच आयोजित की जाएगी। इसमें महंगाई, आर्थिक वृद्धि और वैश्विक परिस्थितियों की समीक्षा के आधार पर आगे की मौद्रिक नीति पर निर्णय लिया जाएगा।