नई दिल्ली, 31 अगस्त 2026। राजधानी में कूड़े और सफाई की समस्या से निपटने के लिए अब तकनीक और विशेषज्ञता का सहारा लिया जाएगा। दिल्ली नगर निगम (MCD) पूरे शहर के ठोस कचरा प्रबंधन तंत्र का वैज्ञानिक ऑडिट कराने की तैयारी में है। इसके लिए MCD, IIT Delhi को तकनीकी और नॉलेज पार्टनर बनाने का प्रस्ताव लेकर आया है।
इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2 करोड़ रुपये है और अध्ययन को लगभग छह महीने में पूरा करने का प्रस्ताव है।
GIS सर्वे से होगी कचरा व्यवस्था की मैपिंग
योजना के तहत IIT Delhi का Centre for Rural Development and Technology दिल्ली में कचरा उत्पादन वाले क्षेत्रों का GIS आधारित सर्वे करेगा। इसके साथ ही वार्ड स्तर पर माइक्रो प्लानिंग तैयार करने और कचरा उठाने वाले वाहनों के रूट को अधिक प्रभावी बनाने में तकनीकी सहयोग दिया जाएगा।
इससे कचरा संग्रहण और परिवहन की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जाएगी।
डिजिटल निगरानी सिस्टम पर भी जोर
MCD कचरा संग्रह और परिवहन की निगरानी के लिए डिजिटल सिस्टम विकसित करने की योजना बना रहा है। इसके जरिए वाहनों की आवाजाही, कचरा उठाने की प्रक्रिया और संबंधित सेवाओं की निगरानी को बेहतर बनाया जा सकेगा।
इससे सफाई व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली में रोजाना 11 हजार टन से ज्यादा कचरा
आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में हर दिन करीब 11,328 टन ठोस कचरा पैदा होता है। इसमें लगभग 11 हजार टन कचरा MCD के अधिकार क्षेत्र से आता है।
कचरे का स्रोत पर सही तरीके से पृथक्करण नहीं होना और लैंडफिल साइटों पर लगातार बढ़ता दबाव दिल्ली के लिए लंबे समय से बड़ी चुनौती बना हुआ है।
बड़े कचरा उत्पादकों और रीसाइक्लिंग सेक्टर पर भी नजर
प्रस्ताव में बड़े स्तर पर कचरा पैदा करने वाले संस्थानों की निगरानी को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। इसके अलावा अनौपचारिक रीसाइक्लिंग क्षेत्र को औपचारिक कचरा प्रबंधन व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
इससे कचरे के पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने और लैंडफिल पर जाने वाले कचरे की मात्रा कम करने में मदद मिल सकती है।
1 सितंबर को प्रस्ताव पर हो सकता है फैसला
MCD की स्थायी समिति इस प्रस्ताव पर 1 सितंबर को विचार कर सकती है। मंजूरी मिलने के बाद IIT Delhi के साथ मिलकर अध्ययन और तकनीकी ऑडिट की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
अगर यह योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो दिल्ली की कचरा प्रबंधन व्यवस्था में तकनीकी सुधार, बेहतर निगरानी और जवाबदेही बढ़ सकती है। इससे राजधानी को अधिक स्वच्छ और वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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