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PM मोदी के भाषण पर जयराम रमेश का तीखा हमला, बोले- वही घिसी-पिटी बातें

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admin
20 जुलाई 2026 को 07:45 am बजे
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संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही सियासी माहौल गर्म हो गया। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन की आलोचना करते हुए कहा कि उनके भाषण में देश के अहम मुद्दों का कोई उल्लेख नहीं था। उन्होंने इसे “घिसी-पिटी बातों का पुलिंदा” करार दिया।

जयराम रमेश ने उठाए कई बड़े मुद्दे

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी अपने बयान में जयराम रमेश ने कहा कि विपक्ष मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार से जवाब चाहता है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इन मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं की।

उन्होंने जिन प्रमुख विषयों का उल्लेख किया, उनमें शामिल हैं—

अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा विवाद और वित्तीय अनियमितताओं का मामला।

NEET UG 2026 में कथित पेपर लीक और CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा से जुड़े विवाद।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और कुछ अन्य मंत्रियों पर लगाए गए कथित भ्रष्टाचार के आरोप।

विपक्षी दलों को तोड़ने के लिए कथित तौर पर राजनीतिक दबाव और प्रलोभन का इस्तेमाल।

कुछ केंद्रीय और राज्य मंत्रियों पर हितों के टकराव (Conflict of Interest) और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप।

परिसीमन प्रक्रिया, ‘एक देश, एक चुनाव’ और अन्य प्रस्तावों के जरिए संविधान के संघीय ढांचे को कमजोर करने के आरोप।

लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी जताई चिंता

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की कुछ नीतियां देश की संघीय व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष इन सभी मुद्दों पर संसद के भीतर विस्तृत चर्चा चाहता है।

PM मोदी ने सार्थक चर्चा की जताई उम्मीद

वहीं, संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उम्मीद जताई कि मानसून सत्र सकारात्मक और परिणामकारी रहेगा। उन्होंने कहा कि “जहां तथ्य और तर्क होते हैं, वहां हंगामे की कोई गुंजाइश नहीं होती।”

प्रधानमंत्री ने सभी दलों से संसद की गरिमा बनाए रखते हुए जनहित के मुद्दों पर रचनात्मक चर्चा करने की अपील की।

वैश्विक चुनौतियों और भारत की अर्थव्यवस्था का किया जिक्र

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में पश्चिम एशिया सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों ने ऊर्जा आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं।

उन्होंने बताया कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत ने पेट्रोल, डीज़ल, एलपीजी, उर्वरक और अन्य आवश्यक क्षेत्रों में चुनौतियों का सामना करते हुए आर्थिक मजबूती बनाए रखी। प्रधानमंत्री के अनुसार, कठिन वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत ने 7.7 प्रतिशत की विकास दर हासिल की और दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति मजबूत रखी।