राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। दिल्ली पुलिस का दावा है कि प्रदर्शन की आड़ में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और पुलिस पर हमले की मंशा से बड़ी संख्या में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग विरोध स्थल तक पहुंचे। पुलिस के अनुसार, फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) की मदद से अब तक 2,500 से अधिक संदिग्धों की पहचान की जा चुकी है और मामले में 15 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं।
20 जुलाई की हिंसा के बाद लगाया गया FRS सिस्टम
दिल्ली पुलिस ने बताया कि 20 जुलाई को हुई हिंसा के बाद जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए FRS कैमरे लगाए गए। इसके बाद 21, 22 और 23 जुलाई के दौरान कैमरों के जरिए बड़ी संख्या में ऐसे लोगों की पहचान की गई, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड पुलिस के पास पहले से मौजूद है।
वॉन्टेड और हिस्ट्रीशीटर अपराधियों पर विशेष नजर
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह निगरानी प्रणाली आम प्रदर्शनकारियों के लिए नहीं, बल्कि वॉन्टेड अपराधियों, भगोड़ों, हिस्ट्रीशीटरों और पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज आदतन अपराधियों की पहचान के लिए इस्तेमाल की जा रही है। उद्देश्य ऐसे लोगों को चिन्हित करना है, जो विरोध प्रदर्शन का फायदा उठाकर कानून-व्यवस्था प्रभावित कर सकते हैं।
मुख्य प्रवेश और निकास द्वारों पर लगाए गए चार FRS कैमरे
जंतर-मंतर के प्रमुख एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर चार FRS यूनिट स्थापित की गई हैं। ये कैमरे सीधे दिल्ली पुलिस के डेटाबेस से जुड़े हैं और उनकी रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। किसी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान होते ही संबंधित पुलिस इकाई को तत्काल अलर्ट भेजा जाता है।
हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों से कुछ सेकंड में होती है पहचान
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, FRS में लगे हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे दूर से भी चेहरों की स्पष्ट तस्वीरें कैप्चर करने में सक्षम हैं। चेहरा रिकॉर्ड होते ही उसे कुछ ही सेकंड में पुलिस डेटाबेस से मिलाया जाता है। यदि कोई वॉन्टेड या फरार आरोपी मिलता है, तो तत्काल कार्रवाई के लिए संबंधित टीम को सूचना भेजी जाती है।
अपराध रोकने और जांच दोनों में मददगार तकनीक
पुलिस का कहना है कि यह तकनीक केवल निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराध की रोकथाम और जांच दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे असामाजिक तत्वों की पहचान जल्दी हो जाती है, जबकि आम प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी मदद मिलती है।
पहले भी बड़े आयोजनों में हो चुका है इस्तेमाल
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि FRS तकनीक का इस्तेमाल पहली बार नहीं किया गया है। इससे पहले गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, होली, दिवाली, ईद, रामलीला और अन्य बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान भी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए इस तकनीक का उपयोग किया जा चुका है।
सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर पुलिस का फोकस
पुलिस का कहना है कि आधुनिक तकनीक के जरिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना और असामाजिक तत्वों पर नजर रखना उनकी प्राथमिकता है। अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की निगरानी व्यवस्था से सार्वजनिक आयोजनों और विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।







