श्रीनगर: दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकियों ने एक बार फिर प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाया। किलाम गांव स्थित एक ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों पर आतंकियों ने बेहद करीब से गोलियां चला दीं। हमले में दीपक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल भूपिंदर ने शनिवार सुबह श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस हमले में मृतकों की संख्या बढ़कर दो हो गई है।
घटना के बाद पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन
हमले की सूचना मिलते ही जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे तथा पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया।
घायल भूपिंदर को पहले अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां ऑपरेशन के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए श्रीनगर के SKIMS अस्पताल रेफर किया गया। हालांकि डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
दस दिनों में दूसरा बड़ा आतंकी हमला
यह घटना दक्षिण कश्मीर में महज दस दिनों के भीतर दूसरा बड़ा आतंकी हमला है।
इससे पहले 22 जुलाई को अनंतनाग में जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) के एक जवान की आतंकियों ने नजदीक से गोली मारकर हत्या कर दी थी।
इसके अलावा अक्टूबर 2024 के बाद यह पहला मौका है, जब आतंकियों ने प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाया है।
प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
पिछले छह वर्षों के आंकड़े घाटी में काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करते हैं। इस दौरान विभिन्न आतंकी घटनाओं में 25 से अधिक प्रवासी मजदूर अपनी जान गंवा चुके हैं।
18 अक्टूबर 2024 को बिहार के मजदूर अशोक चौहान की आतंकियों ने हत्या कर दी थी। इसके दो दिन बाद श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माणाधीन जेड-मोड़ सुरंग के बेस कैंप पर हुए आतंकी हमले में छह प्रवासी मजदूरों और एक कश्मीरी डॉक्टर की मौत हुई थी।
ताजा हमला इस आशंका को मजबूत करता है कि आतंकी संगठन एक बार फिर आम नागरिकों और रोजी-रोटी कमाने आए प्रवासी श्रमिकों को निशाना बना रहे हैं।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने की कड़ी निंदा
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे कायराना आतंकी वारदात बताया।
उन्होंने बताया कि पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात और अन्य वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों से बातचीत कर आतंकियों के खिलाफ अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हमले के दोषियों को जल्द कानून के दायरे में लाया जाएगा और मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
राजनीतिक दलों ने जताया रोष
घटना की विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी कड़ी निंदा की।
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने इसे “अकल्पनीय रूप से क्रूर” और “निरर्थक हिंसा” बताते हुए कहा कि मजदूर अपने परिवार की आजीविका के लिए कश्मीर आए थे, लेकिन आतंकवाद का शिकार बन गए।
सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस ने भी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि लगातार किए जा रहे सुरक्षा दावों के बावजूद निर्दोष नागरिकों पर हमले बेहद चिंताजनक हैं।
वहीं, अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस ने भी इस हमले की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
सुरक्षा व्यवस्था पर फिर खड़े हुए सवाल
कुलगाम की यह घटना एक बार फिर संकेत देती है कि घाटी में आतंकवाद की चुनौती पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। लगातार प्रवासी मजदूरों और आम नागरिकों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं।
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां पूरे इलाके में सघन तलाशी अभियान चला रही हैं और हमलावर आतंकियों की तलाश जारी है। सभी की नजर अब इस अभियान पर है कि दोषियों को कितनी जल्दी गिरफ्तार या ढेर किया जाता है।







