National Thoughts Logo
National Thoughts
AWebPortalOfPositiveJournalism

Gujarat BJP की बढ़ी टेंशन? चुनावी हार के बाद शुरू हुआ Damage Control

a
admin
19 सितंबर 2026 | 01:42 pm IST
Featured Image

गुजरात के सहकारिता क्षेत्र में पिछले दो महीनों के दौरान कई अहम सियासी बदलाव देखने को मिले हैं। बारडोली स्थित प्रसिद्ध श्री खेडूत सहकारी खांड उद्योग मंडली के चुनाव में BJP समर्थित पैनल को बड़ा झटका लगा। कांग्रेस समर्थित किसान परिवर्तन पैनल ने सभी 14 सीटों पर जीत दर्ज कर एकतरफा प्रदर्शन किया।

इस नतीजे के साथ दक्षिण गुजरात की इस प्रमुख सहकारी चीनी मिल में लंबे समय से कायम BJP समर्थित गुट का प्रभाव कमजोर हुआ है। हालिया चुनावों में पार्टी समर्थित पैनलों को चुनौती मिलने और BJP के बागी नेताओं के मैदान में उतरने से सहकारी क्षेत्र में राजनीतिक खींचतान की चर्चा तेज हुई है।

बारडोली शुगर में BJP समर्थित पैनल को बड़ा झटका

बारडोली शुगर में कुल 15 सीटों में से BJP समर्थित सहकार पैनल को केवल दो सीटें मिलीं, जबकि किसान परिवर्तन पैनल ने 13 सीटों पर जीत दर्ज की। इस पैनल में BJP के बागी नेताओं के साथ कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार भी शामिल थे।

इस चुनाव में BJP के बारडोली विधायक ईश्वर परमार को भी हार का सामना करना पड़ा। वह कांग्रेस उम्मीदवार तरुण वाघेला से चुनाव हार गए। खास बात यह है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में परमार ने वाघेला को हराया था।

BJP के भीतर की गुटबाजी भी आई सामने

बारडोली में परिवर्तन पैनल को BJP संगठन से जुड़े कुछ नेताओं का समर्थन मिलने की बात भी सामने आई। निर्वाचित सदस्यों में सूरत जिला पंचायत की BJP अध्यक्ष भाविनी पटेल के पति अतुल पटेल भी शामिल हैं।

बारडोली शुगर के निवर्तमान वाइस-चेयरमैन और सूरत जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष भावेश पटेल ने चुनाव परिणामों को सहकारी संस्थाओं में बढ़ती राजनीतिक दखलंदाजी से जोड़कर देखा। उनके मुताबिक, पहले सहकारी चीनी मिलों के चुनावों में राजनीतिक हस्तक्षेप सीमित था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ये चुनाव राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण मंच बन गए हैं।

13 सहकारी चीनी मिलों में BJP का रहा है प्रभाव

1955 में गुजरात की पहली सहकारी चीनी मिल के रूप में शुरू हुई बारडोली शुगर का सालाना टर्नओवर करीब 600 से 800 करोड़ रुपये बताया जाता है। इसे एशिया की बड़ी सहकारी चीनी मिलों में शामिल किया जाता है।

गुजरात की 13 चालू सहकारी चीनी मिलों में लंबे समय से BJP का प्रभाव रहा है। हालांकि, अगस्त में हुए चुनावों ने पार्टी के भीतर मौजूद मतभेदों को भी सामने ला दिया। जिन छह सहकारी संस्थाओं में चुनाव हुए, उनमें से दो में BJP समर्थित पैनल को विरोधी पैनलों से हार मिली।

सायन शुगर में भी कमजोर हुई BJP की पकड़

सूरत जिले की सायन शुगर के चुनाव में भी BJP समर्थित पैनल को अपेक्षाकृत कम सीटें मिलीं। विकास पैनल ने 18 में से छह सीटें जीतीं, जबकि परिवर्तन पैनल ने नौ सीटों पर जीत दर्ज की। तीन सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गईं।

2 सितंबर को चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन के चयन को लेकर विवाद की स्थिति भी बनी। BJP नेताओं द्वारा कथित तौर पर पार्टी मैंडेट जारी करने की कोशिश का निर्वाचित सदस्यों ने विरोध किया। उनका कहना था कि पदाधिकारियों का चयन चुनी हुई संस्था का अधिकार है।

कांग्रेस नेता और सायन कोऑपरेटिव के निर्वाचित सदस्य दर्शन नाइक ने सहकारी चुनावों में पार्टी मैंडेट की व्यवस्था को राजनीतिकरण से जोड़ते हुए सवाल उठाए।

तीन सहकारी समितियों में BJP ने बरकरार रखा नियंत्रण

बारडोली और सायन में झटका लगने के बावजूद BJP समर्थित पैनलों ने भरूच, गांदेवी और कामरेज की सहकारी समितियों में अपना नियंत्रण बनाए रखा।

कामरेज विभाग सहकारी खांड मंडली उद्योग लिमिटेड में BJP समर्थित सहकार पैनल ने 18 में से 13 सीटें जीतीं। परिवर्तन पैनल को दो और निर्दलीय उम्मीदवारों को तीन सीटें मिलीं। हालांकि, पिछले कार्यकाल में सहकार पैनल के खाते में 16 सीटें थीं।

नवसारी की गांदेवी शुगर में BJP समर्थित समन्वय पैनल ने 11 सीटें जीतीं, जबकि चार सीटें प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई। दोनों पैनलों में बड़ी संख्या में BJP पदाधिकारियों के शामिल होने से मुकाबले में पार्टी के अंदरूनी समीकरण भी दिखाई दिए।

पांडवई शुगर में चुनावी मुकाबला सीमित रहा

भरूच की पांडवई शुगर कोऑपरेटिव में नामांकन वापस लेने के बाद चुनावी मुकाबला काफी सीमित हो गया। नामांकन के आखिरी दिन परिवर्तन पैनल के 14 उम्मीदवारों और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने नाम वापस ले लिया। इसके बाद 16 में से केवल दो सीटों पर चुनाव हुआ और BJP समर्थित सहकार पैनल का बोर्ड पर प्रभाव कायम रहा।

निर्वाचित सदस्यों में गुजरात के जल संसाधन एवं जलापूर्ति मंत्री और गुजरात राज्य शुगर कोऑपरेटिव फैक्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन ईश्वरसिंह पटेल भी शामिल रहे।

BJP ने शुरू किया Damage Control

हालिया चुनावी नतीजों के बाद BJP ने बाकी सहकारी संस्थाओं में संभावित बगावत को रोकने की कोशिशें तेज कर दी हैं। 30 अगस्त से पार्टी नेताओं ने बारडोली कार्यालय में सहकार और परिवर्तन पैनल के निर्वाचित सदस्यों से मुलाकात शुरू की, ताकि चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन पदों के लिए समर्थन का आकलन किया जा सके।

मढ़ी शुगर में BJP के जिला नेताओं ने परिवर्तन कैंप से जुड़े पदाधिकारियों से भी बातचीत की है। बताया गया कि मौजूदा चेयरमैन समीर भक्त के साथ समझौते की संभावनाओं पर चर्चा की गई। दूसरी ओर, कांग्रेस ने भी आगामी सहकारी चुनावों के लिए उम्मीदवार उतारने की तैयारी शुरू कर दी है।

सहकारिता की राजनीति में बदलते समीकरण

गुजरात की सहकारी चीनी मिलों के हालिया चुनावों में जीत-हार के साथ-साथ पार्टी के भीतर के मतभेद और बागी उम्मीदवारों की भूमिका भी चर्चा में रही है। बारडोली और सायन के नतीजों ने BJP समर्थित पैनलों के सामने नई चुनौती रखी है, जबकि भरूच, गांदेवी और कामरेज में पार्टी ने अपना प्रभाव बनाए रखा है। आने वाले सहकारी चुनाव इन बदलते राजनीतिक और संगठनात्मक समीकरणों की दिशा को और स्पष्ट कर सकते हैं।