महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर पुणे में प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है। राज्य सरकार द्वारा वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे को जांच आयोग का सचिव नियुक्त करने पर सहमति जताने के बाद यह फैसला लिया गया। यह नियुक्ति प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों की प्रमुख मांगों में से एक थी।
महाराष्ट्र के मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने देर रात प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों और विधायक रोहित पवार से मुलाकात की। इस बैठक में कांग्रेस विधायक विश्वजीत कदम भी मौजूद थे। बातचीत के दौरान मंत्री ने उम्मीदवारों को बताया कि MPSC के चेयरमैन विवेक भीमन्वार जांच पूरी होने तक छुट्टी पर रहेंगे। हालांकि, सरकार ने उन्हें उनके पद से नहीं हटाया है।
MPSC चेयरमैन विवेक भीमन्वार छुट्टी पर
MPSC की भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद उम्मीदवार जवाबदेही तय करने और आयोग के चेयरमैन के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। पुणे में कई दिनों से जारी प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई थी।
राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय आयोग गठित करने पर सहमति जताई है। चेयरमैन को जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेजने का फैसला भी प्रदर्शनकारियों की मांगों के बीच सामने आया है।
पांच सदस्यीय जांच आयोग का गठन
मामले की जांच के लिए गठित आयोग की अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश दिलीप भोसले करेंगे। वर्तमान में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त के रूप में कार्यरत IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे को आयोग का सचिव बनाया गया है।
आयोग के अन्य सदस्यों में IPS अधिकारी लक्ष्मी गौतम, पूर्व IAS अधिकारी गणेश पाटिल और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी. डी. नाइक शामिल हैं।
पूर्व न्यायाधीश दिलीप भोसले ने प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों को आश्वासन दिया है कि उनकी अन्य मांगों पर भी विचार किया जाएगा। इनमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज कुछ मामलों को वापस लेना, अगले तीन वर्षों में 70,000 पदों पर भर्ती करना, जनवरी में प्रस्तावित ग्रुप C परीक्षा में रिक्तियों की संख्या बढ़ाना और MPSC चेयरमैन व सचिव की नियुक्ति से पहले उनके पिछले रिकॉर्ड की जांच करना शामिल है।
60 दिनों में रिपोर्ट सौंपेगा आयोग
राज्य सरकार ने जांच आयोग को 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई तय करने में मदद मिल सकती है।
MPSC चेयरमैन का पद संवैधानिक पद है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहले स्पष्ट कर चुके हैं कि राज्य सरकार या राज्यपाल अपनी इच्छा से आयोग के चेयरमैन को सीधे पद से नहीं हटा सकते। संविधान के अनुच्छेद 317 में लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को हटाने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। इसलिए विवेक भीमन्वार के खिलाफ किसी भी कार्रवाई के लिए संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होगा।
उम्मीदवारों ने खत्म किया आंदोलन
तुकाराम मुंढे की जांच आयोग में नियुक्ति, चेयरमैन को जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेजने और अन्य मांगों पर विचार करने के आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है।
अब सभी की नजरें जांच आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हैं। आयोग की जांच से MPSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आगे के कदम तय होने की उम्मीद है।







