Raksha Bandhan: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और अपनापन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके सुखी, स्वस्थ और खुशहाल जीवन की कामना करती है। राखी बांधने की परंपरा भले ही सरल नजर आती हो, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में इस दौरान कुछ खास बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
पूजा की थाली सजाने से लेकर तिलक लगाने, राखी बांधने और आरती करने तक हर चरण का अपना महत्व बताया गया है। आइए जानते हैं भाई को राखी बांधने की सही विधि और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
राखी की थाली में रखें ये चीजें
रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने से पहले पूजा की थाली तैयार कर लेनी चाहिए। इसमें राखी, रोली या कुमकुम, अक्षत यानी चावल, दीपक और मिठाई रखी जा सकती है। कई घरों में थाली में फूल और जल भी रखा जाता है।
बेहतर माना जाता है कि राखी बांधने से पहले पूजा की सभी सामग्री एक जगह व्यवस्थित कर ली जाए, ताकि पूजा के दौरान किसी चीज के लिए बीच में उठना न पड़े।
सबसे पहले भाई को लगाएं तिलक
राखी बांधने की शुरुआत भाई को तिलक लगाने से की जाती है। इसके लिए रोली या कुमकुम का इस्तेमाल किया जाता है। तिलक लगाने के बाद भाई के माथे पर अक्षत लगाए जाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं में तिलक को शुभता और मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है, जबकि अक्षत को पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए राखी बांधने से पहले तिलक और अक्षत लगाने की परंपरा कई परिवारों में निभाई जाती है।
इसके बाद बांधें राखी
तिलक और अक्षत लगाने के बाद भाई की कलाई पर राखी बांधी जाती है। राखी बांधते समय ध्यान रखें कि वह न तो बहुत ढीली हो और न ही इतनी कसकर बांधी जाए कि भाई को परेशानी हो।
धार्मिक मान्यता के अनुसार राखी को रक्षा सूत्र माना जाता है। इसे बांधते समय बहन अपने भाई की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करती है।
राखी बांधते समय न करें ये गलती
राखी बांधते समय जल्दबाजी करने से बचना चाहिए। पूजा की सामग्री पहले से तैयार रखें और शांत मन से पूरी विधि करें। कई स्थानों पर यह मान्यता भी प्रचलित है कि राखी बांधने से पहले भाई के माथे पर तिलक और अक्षत जरूर लगाया जाना चाहिए।
साथ ही राखी बांधने के तुरंत बाद उसे उतारना भी उचित नहीं माना जाता। राखी को रक्षा सूत्र के रूप में सम्मान देने की परंपरा है।
राखी बांधने के बाद करें भाई की आरती
राखी बांधने के बाद भाई की आरती की जाती है। इसके लिए पूजा की थाली में जलाए गए दीपक का इस्तेमाल किया जाता है। बहन भाई की आरती उतारकर उसके सुखी, स्वस्थ और सुरक्षित जीवन की कामना करती है।
आरती के बाद भाई अपनी बहन को उपहार देता है और उसकी रक्षा करने का संकल्प लेता है। हालांकि इस रस्म में उपहार से अधिक भाई-बहन के बीच प्रेम, स्नेह और विश्वास को महत्व दिया जाता है।
आरती के बाद खिलाएं मिठाई
आरती पूरी होने के बाद भाई को मिठाई खिलाने की परंपरा है। बहन अपने हाथों से भाई को मिठाई खिलाती है और भाई भी अपनी बहन को मिठाई खिलाता है। इसके बाद दोनों एक-दूसरे को उपहार दे सकते हैं।
इस तरह तिलक, अक्षत, राखी, आरती और मिठाई के साथ रक्षाबंधन की पूजा की विधि पूरी होती है। परिवार के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना भी इस दिन की महत्वपूर्ण परंपराओं में शामिल है।
भद्रा काल का रखें ध्यान
रक्षाबंधन पर राखी बांधते समय भद्रा काल का ध्यान रखने की परंपरा भी प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल में शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है।
इसलिए राखी बांधने से पहले उस वर्ष की तिथि और शुभ मुहूर्त की जानकारी जरूर ले लेनी चाहिए। खासतौर पर राखी बांधने का समय स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना बेहतर माना जाता है।
प्रेम और विश्वास का प्रतीक है रक्षाबंधन
रक्षाबंधन केवल राखी बांधने की रस्म तक सीमित नहीं है। तिलक लगाने से लेकर आरती और मिठाई खिलाने तक हर परंपरा भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और स्नेह को दर्शाती है।
इसलिए रक्षाबंधन के दिन जल्दबाजी करने के बजाय श्रद्धा और पारंपरिक मान्यताओं का ध्यान रखते हुए त्योहार मनाना शुभ माना जाता है।







