भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आज यानी 1 अक्टूबर को अपना 81वां जन्मदिन मना रहे हैं। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के परौंख गांव में 1 अक्टूबर 1945 को जन्मे कोविंद ने कानून की पढ़ाई के बाद वकालत से अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की। बाद में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और वर्ष 2017 में भारत के 14वें राष्ट्रपति बने।
कानपुर से शुरू हुआ सफर
रामनाथ कोविंद ने कानपुर में अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पूरी की। उन्होंने पहले वाणिज्य में स्नातक किया और इसके बाद कानपुर विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की।
वर्ष 1971 में वह दिल्ली बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत हुए। इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय तक वकालत की।
केंद्र सरकार के वकील भी रहे
रामनाथ कोविंद 1977 से 1979 तक दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार के वकील रहे। वर्ष 1980 से 1993 तक उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता के रूप में सेवाएं दीं।
वकालत के दौरान उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों, विशेष रूप से महिलाओं और जरूरतमंद लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए भी काम किया।
राज्यसभा से राष्ट्रीय राजनीति में पहचान
रामनाथ कोविंद अप्रैल 1994 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए। उन्होंने लगातार दो कार्यकाल पूरे किए और मार्च 2006 तक राज्यसभा सदस्य रहे।
इस दौरान वह कई संसदीय समितियों से जुड़े रहे और 2003 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में संयुक्त राष्ट्र महासभा को भी संबोधित किया।
बिहार के राज्यपाल बने
8 अगस्त 2015 को रामनाथ कोविंद को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया। राज्यपाल के रूप में उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपतियों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े कई कदम उठाए।
2017 में बने देश के 14वें राष्ट्रपति
वर्ष 2017 में रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति पद के लिए चुने गए और 25 जुलाई 2017 को उन्होंने भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली।
उन्होंने 25 जुलाई 2017 से 25 जुलाई 2022 तक राष्ट्रपति पद संभाला। इस दौरान उन्होंने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा किया।
वकील से राज्यसभा सदस्य, बिहार के राज्यपाल और फिर राष्ट्रपति बनने तक रामनाथ कोविंद का सार्वजनिक जीवन कई दशकों में फैला रहा है।







