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पश्चिम विहार रामलीला में मनाया गया श्रीराम जन्मोत्सव

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admin
13 अक्टूबर 2026 | 07:11 pm IST
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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित भैरा एन्क्लेव में डीडीए पार्क के निकट रेडिसन होटल के पास आयोजित भव्य श्रीरामलीला महोत्सव में सोमवार को प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर रावण-वेदवती संवाद, गुरु वशिष्ठ का आश्रम, श्रीराम की बाल लीलाएं, शिक्षा-दीक्षा, विश्वामित्र आश्रम, दशरथ दरबार और ताड़का वध तक के प्रसंगों का मंचन किया गया। धार्मिक प्रसंगों को देखने के लिए दर्शकों में खासा उत्साह नजर आया।

मंच पूजन और श्री गणेश पूजन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत

पश्चिम विहार रामलीला कमेटी के चेयरमैन योगेश शर्मा और महामंत्री अश्वनी बागड़ी के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान जाने-माने समाजसेवी विनोद गुप्ता, विकास नारंग, राजेंद्र कत्याल और प्रवीण गुप्ता सहित क्षेत्र के अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने मंच पूजन और श्री गणेश पूजन किया।

इसके बाद रामलीला के विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से दर्शकों को रामायण की महत्वपूर्ण घटनाओं से रूबरू कराया।

माता कौशल्या की भूमिका में नजर आईं पूनम बागड़ी

रामलीला के मंचन में पूर्व निगम पार्षद पूनम बागड़ी ने माता कौशल्या की भूमिका निभाई। उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव और बाल लीलाओं के प्रसंगों ने रामलीला मैदान में भक्तिमय माहौल बना दिया।

47वीं बार आयोजित हो रही ऐतिहासिक रामलीला

रामलीला कमेटी के महामंत्री अश्वनी बागड़ी और समाजसेवी धर्मेंद्र सोलंकी ने बताया कि कमेटी की ओर से भव्य दशहरा महोत्सव की तैयारियां जोर-शोर से की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिमी दिल्ली की इस रामलीला को ऐतिहासिक माना जाता है, क्योंकि इस वर्ष इसका 47वां आयोजन किया जा रहा है।

कमेटी के मुख्य संरक्षक संजय त्यागी ने बताया कि रामलीला के मंचन के दौरान पूरे मैदान में भक्तिमय वातावरण बना रहता है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष आयोजन के माध्यम से बच्चों को धर्म और संस्कारों के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करने का संदेश भी दिया जा रहा है।

बच्चों में धार्मिक संस्कार विकसित करने का संदेश

इस वर्ष रामलीला का प्रमुख संदेश बच्चों को धर्म और संस्कारों से जोड़ना है। आयोजकों का उद्देश्य है कि बच्चे अच्छे संस्कार अपनाएं, अपने परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करें और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें।

आयोजकों के अनुसार, रामलीला केवल धार्मिक मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और नैतिक शिक्षा से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास भी है।