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जीवन का लक्ष्य क्या हो? श्याम सुंदर पाराशर जी ने बताया

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admin
22 जुलाई 2026 को 04:35 am बजे
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Satsang, Importance of Dharma: मनुष्य का जीवन केवल जन्म लेने, भोजन करने, धन अर्जित करने और एक दिन इस संसार से विदा हो जाने तक सीमित नहीं है। यह ईश्वर का दिया हुआ एक दुर्लभ और अमूल्य अवसर है, जिसका उद्देश्य केवल भौतिक सुखों का उपभोग करना नहीं, बल्कि अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानना, आत्मज्ञान प्राप्त करना और परम सत्य की खोज करना है। यही प्रेरणादायक संदेश कथा के दौरान श्याम सुंदर पाराशर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को दिया।

श्री शुकदेव जी का ज्ञान मानवता के लिए अमूल्य धरोहर

महाराज ने कहा कि जिन महान संतों के वचनों का देवता भी सम्मान करते हैं और जिन्हें समस्त प्राणी पुत्रवत स्नेह देते हैं, ऐसे व्यासपुत्र परम ज्ञानी श्री शुकदेव जी महाराज के श्रीचरणों में बार-बार प्रणाम करना चाहिए। उन्होंने वेदों और उपनिषदों का सार प्रस्तुत कर श्रीमद्भागवत महापुराण के रूप में ऐसा दिव्य ज्ञान दिया, जिसने अनगिनत लोगों को सत्य और धर्म का मार्ग दिखाया। जैसे अंधकार में दीपक राह दिखाता है, उसी प्रकार श्रीमद्भागवत मनुष्य के आध्यात्मिक जीवन को प्रकाशित करती है।

श्रीमद्भागवत का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक

श्याम सुंदर पाराशर जी महाराज ने बताया कि श्री शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को जो उपदेश दिए, वे केवल उस युग तक सीमित नहीं थे, बल्कि आज भी प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में समान रूप से उपयोगी हैं। श्रीमद्भागवत का मूल संदेश यह है कि मनुष्य जीवन केवल सांसारिक जिम्मेदारियों और भौतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। यदि व्यक्ति पूरा जीवन केवल धन, परिवार और सुख-सुविधाओं के पीछे ही लगा देता है, तो वह अपने जीवन के सबसे बड़े उद्देश्य से दूर रह जाता है।

मनुष्य जीवन का लक्ष्य है तत्त्व की जिज्ञासा

महाराज ने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि “जीवस्य तत्त्व जिज्ञासा” अर्थात मनुष्य जीवन का वास्तविक लक्ष्य परम तत्त्व को जानने की जिज्ञासा रखना है। तत्त्व वही परम सत्य है, जिससे सम्पूर्ण सृष्टि की उत्पत्ति हुई है और जिसमें अंततः सब कुछ विलीन हो जाता है। जब मनुष्य के मन में यह प्रश्न उठता है कि मैं कौन हूँ, इस संसार में क्यों आया हूँ और मेरे जीवन का वास्तविक उद्देश्य क्या है, तभी उसके आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत होती है।

भौतिक सुख स्थायी शांति नहीं दे सकते

श्याम सुंदर पाराशर जी महाराज ने कहा कि धन, पद, प्रतिष्ठा और सांसारिक सुख क्षणिक आनंद अवश्य दे सकते हैं, लेकिन वे मन को स्थायी शांति नहीं दे सकते। जब तक मनुष्य अपने आत्मस्वरूप को नहीं पहचानता और भगवान से अपना संबंध स्थापित नहीं करता, तब तक उसके भीतर एक अधूरापन बना रहता है। इसलिए जीवन में केवल सफलता ही नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा, सेवा, भक्ति और सत्य के प्रति समर्पण का भाव विकसित करना भी आवश्यक है।

सत्संग और भक्ति से मिलता है सही मार्ग

महाराज ने समझाया कि जैसे अंधकार में दीपक सही दिशा दिखाता है, उसी प्रकार संतों का सान्निध्य, सत्संग और श्रीमद्भागवत का अध्ययन मनुष्य को जीवन का सही मार्ग दिखाते हैं। जो व्यक्ति नियमित रूप से सत्संग करता है, शास्त्रों का अध्ययन करता है और ईश्वर के प्रति श्रद्धा रखता है, वह धीरे-धीरे जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने लगता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आत्मचिंतन, भक्ति और सत्कर्मों के लिए समय निकालने का आग्रह किया।

परम सत्य की खोज ही मानव जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि

श्याम सुंदर पाराशर जी महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन का लक्ष्य केवल भौतिक उपलब्धियाँ अर्जित करना नहीं, बल्कि परम सत्य की खोज करना, आत्मज्ञान प्राप्त करना और भगवान से अपना संबंध मजबूत करना है। जब व्यक्ति तत्त्व को जानने की जिज्ञासा जागृत करता है और आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ता है, तभी उसका जीवन वास्तव में सफल, सार्थक और धन्य बनता है। यही श्रीमद्भागवत का अमर संदेश है और यही मानव जीवन की सर्वोच्च उपलब्धि भी है।