पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (POJK) में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेताओं ने पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदर्शनकारी नेताओं का दावा है कि उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को बलपूर्वक दबाने की कोशिश की जा रही है और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की गई है।
JAAC नेता का बड़ा आरोप
सीएनएन-न्यूज़18 को भेजे गए एक संदेश में JAAC नेता शौकत मीर ने आरोप लगाया कि रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोली चलाई गई और आंदोलन को कुचलने का प्रयास किया गया।
उन्होंने दावा किया कि उनका संगठन केवल बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर शांतिपूर्ण, अहिंसक और निहत्था आंदोलन चला रहा था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें आतंकवादी करार दिया गया।
“हमने सिर्फ अधिकारों की मांग की”
शौकत मीर ने कहा कि आंदोलनकारियों ने कभी भी पाकिस्तान राज्य या सत्ता के खिलाफ कोई अभियान नहीं चलाया। उनका कहना था कि प्रदर्शनकारी केवल अपने लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि सरकार उन्हें आतंकवादी मानती है, तो फिर अतीत में उनसे बातचीत क्यों की गई।
क्षेत्र में बढ़ा तनाव
विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
मौतों और घायलों के अलग-अलग दावे
अधिकारियों के अनुसार, हालिया झड़पों और कार्रवाई में कम से कम 11 लोगों की मौत हुई है, जिनमें सात नागरिक और चार पुलिसकर्मी शामिल हैं। इसके अलावा कई लोग घायल हुए हैं।
वहीं, JAAC का दावा है कि मृतकों की संख्या इससे कहीं अधिक है। संगठन के अनुसार कम से कम 27 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है, जबकि स्थानीय लोगों के हवाले से इससे भी अधिक संख्या बताए जाने का दावा किया गया है।
इंटरनेट सेवाएं बंद
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी हैं। इसके कारण क्षेत्र का बाहरी दुनिया से संपर्क काफी हद तक प्रभावित हुआ है।
अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग
रिपोर्टों के मुताबिक, क्षेत्रीय प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संघीय सरकार से अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग की है।
बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।
क्या है JAAC की मुख्य मांग?
संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) लंबे समय से उन 12 आरक्षित सीटों को समाप्त करने की मांग कर रही है, जो 1947 के बाद मुख्य भूमि पाकिस्तान में बसे जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों के लिए निर्धारित हैं।
अधिक स्वायत्तता की मांग
JAAC का आरोप है कि इन सीटों का इस्तेमाल मुख्यधारा की पाकिस्तानी राजनीतिक पार्टियां क्षेत्रीय राजनीति और सरकार गठन को प्रभावित करने के लिए करती हैं।
संगठन का मानना है कि इन सीटों को समाप्त करने से क्षेत्र को अधिक राजनीतिक स्वायत्तता मिल सकेगी और स्थानीय जनता का प्रतिनिधित्व मजबूत होगा।
हड़ताल के आह्वान से बढ़ सकती है हलचल
JAAC ने पूरे क्षेत्र में हड़ताल का आह्वान किया है। यह आंदोलन ऐसे समय में तेज हुआ है जब 27 जुलाई को प्रस्तावित चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होने वाली है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान यह विवाद और अधिक गहरा सकता है।
JAAC पर लगाया गया प्रतिबंध
सरकार ने हाल ही में आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बाद संगठन और प्रशासन के बीच टकराव और बढ़ गया है।
फिलहाल क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रशासन तथा प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध जारी है।