मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा अप्रत्याशित रूप से तीसरा उम्मीदवार उतारे जाने के बाद कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। दल-बदल और क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं के बीच कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें कांग्रेस शासित राज्यों में भेजने के विकल्प पर विचार कर रही है।
तीसरी सीट पर बढ़ी सियासी दिलचस्पी
राज्यसभा चुनाव के लिए मध्य प्रदेश विधानसभा निर्वाचक मंडल की भूमिका निभाती है। 230 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल प्रभावी संख्या 229 है। किसी भी उम्मीदवार की जीत के लिए 58 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता होगी।
भाजपा के पास वर्तमान में 164 विधायक हैं, जिसके चलते वह दो सीटें जीतने की मजबूत स्थिति में है। पार्टी ने अपने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और प्रदेश इकाई के सचिव रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है।
भाजपा ने उतारा तीसरा उम्मीदवार
चुनाव ने सोमवार को नया मोड़ तब लिया जब नामांकन के अंतिम दिन भाजपा ने मध्य प्रदेश मत्स्य कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को तीसरे उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतार दिया।
गुप्त रखी गई थी रणनीति
पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने कई दिनों तक अपनी रणनीति को गोपनीय रखा। केंद्रीय नेतृत्व के साथ विस्तृत चर्चा के बाद महेश केवट की उम्मीदवारी पर अंतिम फैसला लिया गया।
भाजपा के इस कदम ने राज्यसभा की तीसरी सीट के मुकाबले को और रोचक बना दिया है।
कांग्रेस को मीनाक्षी नटराजन पर भरोसा
कांग्रेस ने पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार बनाया है। भाजपा के तीसरे उम्मीदवार के मैदान में आने से चुनावी समीकरण भले ही जटिल हो गए हों, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व को विश्वास है कि उन्हें पर्याप्त समर्थन प्राप्त होगा।
पार्टी का मानना है कि उसके पास जीत के लिए जरूरी आंकड़े जुटाने की संभावना बनी हुई है।
विधायकों को दूसरे राज्यों में भेजने पर मंथन
भाजपा के तीसरे उम्मीदवार की घोषणा के बाद कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
कर्नाटक या तेलंगाना भेजे जा सकते हैं विधायक
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस अपने विधायकों को मतदान तक कांग्रेस शासित राज्यों, जैसे कर्नाटक या तेलंगाना, में भेजने पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य संभावित टूट-फूट या क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं को रोकना है।
विपक्ष के नेता के आवास पर हुई बैठक
सोमवार देर रात कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक विपक्ष के नेता उमंग सिंघर के आवास पर आयोजित की गई। बैठक में राज्यसभा चुनाव की रणनीति और विधायकों को राज्य से बाहर भेजने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई।
केंद्रीय नेतृत्व की सलाह पर विचार
सूत्रों का कहना है कि विधायकों को सुरक्षित स्थान पर रखने का सुझाव पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से आया है। बैठक में मौजूद नेताओं से इस प्रस्ताव पर राय भी ली गई।
तीसरी सीट पर नजरें टिकीं
राज्यसभा चुनाव में भाजपा के तीसरे उम्मीदवार की एंट्री के बाद तीसरी सीट का मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। अब सभी की नजरें कांग्रेस की रणनीति और आगामी दिनों में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी हैं।
18 जून को होने वाला मतदान तय करेगा कि तीसरी सीट पर किस दल की रणनीति सफल होती है और किसे राजनीतिक बढ़त मिलती है।