उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मतदाता सूची को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट से एक करोड़ से अधिक हिंदू मतदाताओं के नाम गायब हैं। मुख्यमंत्री ने इस पर चिंता जताते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं से छूटे हुए पात्र मतदाताओं के नाम सूची में जुड़वाने की जिम्मेदारी उठाने को कहा है।
दरअसल, कांग्रेस समेत विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग पर मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाने का आरोप लगा रहे हैं। इसी बीच योगी आदित्यनाथ के बयान ने इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
पवन खेड़ा ने योगी आदित्यनाथ पर कसा तंज
योगी आदित्यनाथ के बयान पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया के जरिए तंज कसा। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “ज्ञानेश से हैं परेशान? तो फिर कहां है आपका ध्यान? रामलीला मैदान तो इधर है श्रीमान। आज की महारैली में आपका भी स्वागत है योगी जी।”
पवन खेड़ा की इस टिप्पणी को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस की महारैली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।
चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन
कांग्रेस दिल्ली के रामलीला मैदान में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है। पार्टी की मांग है कि चुनाव आयोग कथित चुनावी गड़बड़ियों पर जवाब दे और मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से इस्तीफा दें।
विपक्षी दल लगातार मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और नाम हटाए जाने का मुद्दा उठा रहे हैं। ऐसे में योगी आदित्यनाथ का बयान इस राजनीतिक टकराव को नया मोड़ दे सकता है।
योगी आदित्यनाथ ने वोटर लिस्ट को लेकर क्या आंकड़े बताए?
बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मतदाता सूची से जुड़े कई आंकड़े पेश किए। उन्होंने दावा किया कि करीब 66 लाख ऐसे लोग हैं, जिनके नाम पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज हैं, लेकिन विधानसभा की मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले करीब 55 लाख लोगों के नाम भी वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं हैं।
18 से 19 साल के साढ़े चार लाख युवाओं के नाम भी गायब होने का दावा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 18 से 19 वर्ष की आयु के युवाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इस आयु वर्ग के करीब साढ़े चार लाख युवाओं के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं।
इन आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं से छूटे हुए पात्र मतदाताओं की पहचान करने और उनके नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के लिए विशेष अभियान चलाने पर जोर दिया।




