भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने बुधवार को अपने कामकाज और Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सामने आई रिपोर्ट पर स्पष्टीकरण जारी किया। आयोग ने कहा कि किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और सुझाव आना सामान्य प्रक्रिया है। ECI के मुताबिक, उसके फैसले सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर लिए जाते हैं।
यह स्पष्टीकरण द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर 14 बार आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट में SIR, मतदाता पंजीकरण और चुनावी डेटा से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख है।
संवैधानिक संस्था है चुनाव आयोग
ECI ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324, संबंधित कानूनों और स्थापित संस्थागत प्रक्रियाओं के तहत काम करता है। आयोग के अनुसार, लिखित नोट, टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच-पड़ताल उसके कामकाज में सामान्य checks and balances का हिस्सा हैं।
फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से होते हैं
आयोग ने स्पष्ट किया कि उसके आधिकारिक आदेश, फैसले और प्रशासनिक निर्देश निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किए जाते हैं। ECI के अनुसार, आयोग में किसी मुद्दे पर अलग-अलग राय होना अपने आप में अंतिम फैसले पर असहमति का संकेत नहीं है।
सुझाव देना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया
ECI ने कहा कि ड्राफ्टिंग और निर्णय लेने के दौरान सदस्यों की ओर से सवाल उठाना या सुझाव देना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग के मुताबिक, ऐसे सुझावों का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाना और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना है।
अधिकारियों को भी सुझाव देने का अधिकार
आयोग के मुताबिक, केवल तीनों चुनाव आयुक्त ही नहीं, बल्कि ECI का कोई भी अधिकारी चुनावी व्यवस्था से जुड़े मामलों में सुझाव दे सकता है। आयोग ने कहा कि विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय होना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है।
14 आपत्तियों को पूरी तस्वीर नहीं बताया
ECI ने कहा कि 10 महीने की अवधि में कुछ आंतरिक टिप्पणियों को अलग से सामने लाने से आयोग के पूरे कामकाज की तस्वीर सामने नहीं आती। आयोग के अनुसार, इस अवधि में कई फैसले, निर्देश और करीब 40 नई पहलें शुरू की गईं।
ECI ने दावा किया कि पिछले एक साल में उसके कई बड़े फैसले और चुनावी सुधार आयोग के स्तर पर सर्वसम्मति से किए गए हैं। इनमें देशभर में मतदाता सूची के संशोधन और SIR से जुड़ी प्रक्रियाएं भी शामिल हैं।
कई राज्यों में चुनाव कराने का हवाला
आयोग ने अपने बयान में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में चुनाव तथा चुनाव संबंधी गतिविधियों के संचालन का भी उल्लेख किया। ECI के मुताबिक, इन प्रक्रियाओं में बड़े स्तर पर प्रशासनिक तैयारियां, मंजूरियां और निर्देश शामिल रहे।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डेटा सुरक्षा का दावा
ECI ने कहा कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म, जिनमें ECINet शामिल है, डेटा की सुरक्षा और अनधिकृत बदलाव रोकने के लिए निर्धारित साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं। आयोग ने कहा कि IT सुरक्षा जांच और ऑडिट चुनावी डेटाबेस की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं।
वहीं, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से चुनावी डेटाबेस तक पहुंच और उसके केंद्रीकरण को लेकर सवाल उठाए जाने का दावा किया गया है।
ERO और DEO की कानूनी भूमिका
आयोग ने कहा कि Electoral Registration Officers (EROs) और District Election Officers (DEOs) जैसे वैधानिक अधिकारी कानून के तहत मतदाता पंजीकरण और नाम हटाने से जुड़े अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हैं। ECI के मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया में इन अधिकारियों की कानूनी भूमिका निर्धारित है।
आयोग ने SIR पर सर्वसम्मति का दावा दोहराया
ECI ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि SIR से जुड़े फैसले भी आयोग की सहमति से लिए गए हैं। आयोग का यह बयान उस रिपोर्ट में लगाए गए उन दावों के संदर्भ में आया है, जिनमें दो चुनाव आयुक्तों की ओर से विभिन्न प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात कही गई थी।
संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने की बात
चुनाव आयोग ने कहा कि वह लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी संवैधानिक भूमिका को समझता है और अपने दायित्वों को पूरी ईमानदारी के साथ निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस तरह, एक ओर ECI ने अलग-अलग राय को सामान्य संस्थागत प्रक्रिया बताया है और SIR समेत फैसलों पर सर्वसम्मति का दावा किया है। दूसरी ओर, द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई 14 आपत्तियों का विवरण दिया गया है। इसलिए दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।







