फिच रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया है। रेटिंग एजेंसी ने अप्रैल-जून तिमाही में दर्ज मजबूत आर्थिक वृद्धि और अर्थव्यवस्था की समग्र मजबूती को इसके पीछे प्रमुख कारण बताया है।
हालांकि, फिच का अनुमान है कि वित्त वर्ष के बाकी हिस्से में भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार कुछ धीमी हो सकती है।
अप्रैल-जून तिमाही में मजबूत रही अर्थव्यवस्था
फिच के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। एजेंसी ने कहा कि 2026 की पहली छमाही में व्यापारिक परिस्थितियों में आई बड़ी गिरावट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई।
हालांकि, क्रय प्रबंधक सूचकांक (PMI) के आंकड़े विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में विस्तार की गति धीमी होने के संकेत दे रहे हैं।
कमजोर मानसून और महंगाई बनी चुनौती
फिच ने कहा कि सामान्य से कम मानसूनी बारिश का असर कृषि क्षेत्र और ग्रामीण मांग की वृद्धि पर पड़ सकता है। वहीं, बढ़ती महंगाई से लोगों की वास्तविक आय और उपभोक्ता गतिविधियों पर दबाव पड़ने की संभावना है।
इसके बावजूद एजेंसी ने निजी निवेश की संभावनाओं को मजबूत बताया है। फिच को उम्मीद है कि निवेश में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो सकती है। वहीं, जुलाई में गैर-खाद्य ऋण की वृद्धि दर सालाना आधार पर करीब 19 प्रतिशत रही।
RBI की ब्याज दरों पर भी फिच का अनुमान
फिच का अनुमान है कि मजबूत मांग, बढ़ती कीमतों और आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अक्टूबर की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है।
एजेंसी के मुताबिक, इसके बाद 2027 की शुरुआत में भी दर में एक और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे यह 5.75 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। वहीं, 2028 में ब्याज दर घटकर 5.5 प्रतिशत आने का अनुमान जताया गया है।
S&P और Moody’s का भी 7% ग्रोथ अनुमान
भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर अन्य रेटिंग एजेंसियों के अनुमान भी सामने आए हैं। S&P Global Ratings ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान 7 प्रतिशत लगाया है।
वहीं, Moody’s Ratings ने भी हाल ही में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था।
पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी।







