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हवाई किराए पर सरकार की लगाम, असाधारण हालात में तय होंगे टिकट के दाम

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admin
2 नवंबर 2026 | 02:37 pm IST
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केंद्र सरकार ने देश के विमानन क्षेत्र को लेकर अहम कदम उठाया है। नए नियमों के तहत अब आपातकालीन या ‘असाधारण परिस्थितियों’ और जनहित में केंद्र सरकार को एयरलाइन टिकटों के किराए में हस्तक्षेप करने का कानूनी अधिकार मिल गया है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब कच्चे तेल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच हवाई किराए को लेकर यात्रियों और विशेषज्ञों की चिंता बढ़ रही है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने ‘भारतीय वायुयान नियम, 2026’ अधिसूचित किए हैं। ये नियम 1 जनवरी, 2027 से पूरे देश में लागू होंगे।

नए प्रावधानों के अनुसार, यदि सरकार को लगता है कि किसी असाधारण परिस्थिति में हवाई किराए बहुत अधिक बढ़ गए हैं और जनहित में हस्तक्षेप जरूरी है, तो वह एयरलाइनों को किराए के संबंध में सीधे निर्देश जारी कर सकेगी। हालांकि, ऐसे निर्देश संबंधित परिस्थितियों के अनुरूप और सीमित अवधि के लिए ही लागू होंगे।

भारतीय वायुयान नियम 2026 का नियम 192 क्या कहता है?

नियम 192 के तहत अनुसूचित हवाई सेवाएं संचालित करने वाली एयरलाइनों को परिचालन लागत जैसे कारकों के आधार पर किराया तय करना होगा। साथ ही, उन्हें किराए का विवरण नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को सौंपना होगा।

नियमों में कहा गया है कि यदि केंद्र सरकार को किसी असाधारण स्थिति में जनहित के लिए हस्तक्षेप आवश्यक लगता है, तो वह एयरलाइनों को लिखित निर्देश जारी कर सकती है।

पारदर्शिता बनाए रखने और यात्रियों को सही जानकारी देने के लिए एयरलाइनों को अपनी वेबसाइट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किराए का विवरण उपलब्ध कराना होगा। DGCA अनुसूचित एयरलाइनों द्वारा तय किए गए किराए की निगरानी करेगा।

एयरलाइनों को किराए का विस्तृत ब्योरा देना होगा

नए नियमों के तहत एयरलाइनों को टिकट की कीमत का पूरा विवरण अलग-अलग देना होगा। इसमें शामिल होंगे:

मूल किराया (बेस फेयर)

टैक्स और अन्य शुल्क

टिकट रद्द करने का शुल्क

रिफंड की शर्तें

अन्य लागू शुल्क

भारत में 1994 में हवाई किराए तय करने की प्रक्रिया को नियंत्रण मुक्त कर दिया गया था। इसके बाद एयरलाइनों को बाजार की परिस्थितियों के आधार पर टिकटों की कीमत तय करने की छूट मिली।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, एयरलाइंस आमतौर पर मांग, परिचालन लागत और टिकट बुकिंग के समय को ध्यान में रखकर किराया तय करती हैं। इसी वजह से यात्रियों को अलग-अलग मूल्य श्रेणियों में टिकट उपलब्ध होते हैं।

पुराने नियमों में क्या था प्रावधान?

‘एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937’ के नियम 135(4) के तहत DGCA को विमानन क्षेत्र में अत्यधिक या अनुचित मूल्य निर्धारण (Predatory Pricing) अथवा कुछ कंपनियों के बाजार पर वर्चस्व जैसी स्थिति दिखाई देने पर निर्देश जारी करने का अधिकार था।

हालांकि, नए अधिसूचित नियम 192 में एयरलाइन किराए की निगरानी का प्रावधान बरकरार रखा गया है, लेकिन अत्यधिक या अनुचित मूल्य निर्धारण और कुछ कंपनियों के वर्चस्व वाली प्रथाओं को सरकार के हस्तक्षेप का स्पष्ट आधार नहीं बताया गया है।

विशेष परिस्थितियों में ही होगा सरकारी हस्तक्षेप

नया ढांचा केंद्र सरकार को असाधारण परिस्थितियों में एयरलाइन किराए के संबंध में निर्देश जारी करने की शक्ति देता है। यह अधिकार जनहित और नियमों में निर्धारित शर्तों के अधीन होगा।

इस कदम का उद्देश्य विशेष परिस्थितियों में हवाई किराए को नियंत्रित करने और यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए सरकार को हस्तक्षेप का कानूनी आधार उपलब्ध कराना है।