18 मिनट बाद तय कक्षा में पहुंचा EOS-05
आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च होने के करीब 18 मिनट बाद EOS-05 को सफलतापूर्वक सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया गया।
ISRO प्रमुख के मुताबिक, यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पहली बार किसी अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर जियो-प्लेटफॉर्म पर तैनात करने की दिशा में यह मिशन अहम कदम है।
सात साल की लाइफ, नौ साल तक काम करने की उम्मीद
वी. नारायणन ने बताया कि EOS-05 की निर्धारित मिशन लाइफ सात साल है। हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि सैटेलाइट अपनी क्षमता के आधार पर करीब नौ साल तक काम कर सकता है।
उन्होंने बताया कि यह अब तक GSLV व्हीकल से लॉन्च किया गया सबसे भारी सैटेलाइट है। साथ ही, चालू वित्तीय वर्ष में यह ISRO का दूसरा सफल मिशन है।
‘आसमान में आंख’ की तरह करेगा काम
EOS-05 को एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने ‘आसमान में आंख’ (Eye in the Sky) बताया है। सैटेलाइट से मिलने वाली तस्वीरों और डेटा का इस्तेमाल कृषि, आपदा प्रबंधन और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा सकेगा।
इससे जमीन पर होने वाले बदलावों की निगरानी और विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर योजना बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
गगनयान मिशन पर भी तेज हुआ काम
ISRO प्रमुख ने भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि पहले मानवरहित मिशन पर व्यवस्थित और तेजी से काम चल रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि गगनयान एक तकनीक-आधारित मिशन है और इसमें मानव जीवन शामिल होने के कारण सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। अब तक करीब 8,000 परीक्षण पूरे किए जा चुके हैं।
पहले होंगे तीन मानवरहित मिशन
मानवयुक्त गगनयान मिशन से पहले ISRO तीन मानवरहित मिशन की योजना पर काम कर रहा है। इन मिशनों के जरिए अंतरिक्ष यान, लॉन्च सिस्टम और अन्य तकनीकों को पूरी तरह परखा जाएगा, ताकि मानव मिशन से पहले सभी जरूरी सुरक्षा मानकों की पुष्टि की जा सके।
इस वित्तीय वर्ष में 6 और लॉन्च का लक्ष्य
ISRO प्रमुख ने बताया कि संगठन चालू वित्तीय वर्ष में छह और लॉन्च करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। इन आगामी मिशनों के जरिए भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को और मजबूत करने पर जोर रहेगा।
GSLV-F17 की सफलता के बाद अब ISRO की नजर आगामी लॉन्च और गगनयान मिशन की तैयारियों पर है। EOS-05 से मिलने वाला डेटा कृषि, आपदा प्रबंधन और अन्य क्षेत्रों के लिए उपयोगी साबित होने की उम्मीद है।
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