जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पांच महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए हैं। इनमें मंत्रियों और विधायकों के वेतन-भत्तों में संशोधन, पूर्व विधायकों की पेंशन, जीएसटी कानून में बदलाव और कारोबार तथा जीवन को आसान बनाने से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। इन विधेयकों को 28 सितंबर 2026 को विधानसभा के शरद सत्र के दौरान पेश किया गया।
विधायकों की सैलरी बढ़ाने का प्रस्ताव
सबसे ज्यादा चर्चा विधायकों के वेतन और भत्तों से जुड़े प्रस्ताव की हो रही है। रिपोर्टों के अनुसार, विधायकों का मौजूदा कुल मासिक पारिश्रमिक करीब 1.8 लाख रुपये से बढ़ाकर लगभग 3 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। हालांकि, यह बढ़ोतरी अभी प्रस्तावित है और इसे लागू होने से पहले विधायी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, जिनके पास कानून, न्याय और संसदीय मामलों का विभाग भी है, ने जम्मू-कश्मीर मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के वेतन अधिनियम, 1956 में संशोधन से जुड़ा विधेयक भी पेश किया। इसके अलावा विधायकों के वेतन और भत्तों से संबंधित 1960 के कानून में बदलाव का प्रस्ताव सदन के सामने रखा गया है।
पूर्व विधायकों की पेंशन में भी बदलाव
सरकार ने जम्मू-कश्मीर राज्य विधानमंडल सदस्य पेंशन अधिनियम, 1984 में संशोधन का विधेयक भी पेश किया है। इसका उद्देश्य पूर्व विधायकों की पेंशन और उससे जुड़े प्रावधानों की समीक्षा करना है। वेतन, भत्ते और पेंशन से जुड़े तीन अलग-अलग विधेयक सदन में रखे गए हैं।
कारोबार और जीवन को आसान बनाने पर जोर
सरकार ने एक अन्य विधेयक के जरिए कुछ कानूनों और अपराध संबंधी प्रावधानों को तर्कसंगत बनाने तथा कुछ मामलों को अपराध की श्रेणी से हटाने का प्रस्ताव रखा है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य अनुमति आधारित नियंत्रणों को कम कर नियम आधारित शासन व्यवस्था को बढ़ावा देना है।
प्रस्तावित कानून में Ease of Doing Business और Ease of Living को बेहतर बनाने के साथ निवेश आकर्षित करने, रोजगार सृजन और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की बात कही गई है। कुछ पुराने कानूनों को निरस्त करने का प्रावधान भी इसमें शामिल है।
GST कानून में संशोधन का भी बिल
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वित्त मंत्री के रूप में जम्मू-कश्मीर वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 में संशोधन से जुड़ा विधेयक भी विधानसभा में पेश किया। इसे J&K GST Amendment Bill, 2026 के रूप में सदन के सामने रखा गया है।
इस तरह सरकार की ओर से पेश पांच विधेयक मुख्य रूप से GST, मंत्रियों और विधायकों के वेतन-भत्ते, पूर्व विधायकों की पेंशन तथा कानूनों को सरल और तर्कसंगत बनाने से जुड़े हैं। अब इन विधेयकों पर विधानसभा की आगे की प्रक्रिया और चर्चा के बाद अंतिम फैसला होगा।







