उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक 29 सितंबर से नामांकन शुरू हो गए हैं, जबकि उम्मीदवार 6 अक्टूबर तक नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर को होगी और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। जरूरत पड़ने पर मतदान 16 अक्टूबर 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना शुरू होगी।
NDA और SP खेमे का क्या है गणित?
उत्तर प्रदेश में इस बार राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 37 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत बताई जा रही है। हालिया राजनीतिक गणित के अनुसार, भाजपा नेतृत्व वाले NDA के पास करीब 289 विधायक हैं, जबकि समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे के पास करीब 103 वोट बताए जा रहे हैं।
इन आंकड़ों के आधार पर NDA सात सीटों के लिए आवश्यक संख्या आसानी से जुटा सकता है। इसके बाद बचने वाले अतिरिक्त वोटों और अन्य दलों अथवा विधायकों के समर्थन की भूमिका अगली सीट के मुकाबले में महत्वपूर्ण हो सकती है।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगी खेमे के पास मौजूद संख्या दो सीटों के लिए पर्याप्त मानी जा रही है। अतिरिक्त सीट पर मुकाबला होने की स्थिति में दूसरे दलों के समर्थन, अतिरिक्त मतों और वरीयता वोटों का महत्व बढ़ सकता है।
उम्मीदवारों के नाम पर मंथन तेज
राज्यसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों खेमों में उम्मीदवारों के चयन को लेकर गतिविधियां तेज हैं। भाजपा के सामने यह सवाल भी है कि वह मौजूदा सदस्यों में से किन चेहरों को दोबारा मौका देती है और किन नए नेताओं को राज्यसभा भेजती है। इसी तरह समाजवादी पार्टी में भी संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चा बनी हुई है।
16 अक्टूबर को होगा मतदान
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों में से नौ सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है, जबकि भाजपा नेता दिनेश शर्मा के इस्तीफे के कारण एक सीट पहले ही खाली हो चुकी है। चुनाव आयोग ने इन सभी 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान निर्धारित किया है।
कार्यकाल पूरा करने वाले प्रमुख सदस्यों में भाजपा के हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, नीरज शेखर, बृजलाल, सीमा द्विवेदी, बीएल वर्मा और गीता शाक्य, समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव तथा बहुजन समाज पार्टी के रामजी गौतम शामिल हैं।
राज्यसभा चुनाव का यह मुकाबला इसलिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके कुछ महीने बाद उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमे अपने विधायकों को एकजुट रखने के साथ-साथ अतिरिक्त समर्थन जुटाने पर भी नजर बनाए हुए हैं।







