इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से चोरी का आरोप
पुलिस के मुताबिक, आरोपी हाई-एंड वाहनों को चोरी करने के लिए आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कंप्यूटर आधारित स्कैनिंग सिस्टम और डुप्लीकेट इलेक्ट्रॉनिक चाबियों का इस्तेमाल करते थे। वाहन चोरी करने के बाद कथित तौर पर उन पर फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) और नकली हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) लगाई जाती थीं।
इसका मकसद चोरी की गाड़ियों को पहचान से बचाते हुए एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाना बताया जा रहा है।
पांच चोरी की गाड़ियां समेत सामान बरामद
पुलिस का दावा है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और बड़ी संख्या में लग्जरी गाड़ियों को अलग-अलग रिसीवरों तक पहुंचाया गया। पुलिस कार्रवाई में पांच चोरी के वाहन, डुप्लीकेट चाबियां, 100 से अधिक कथित फर्जी HSRP, कई फर्जी RC, मोबाइल फोन और अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं।
गिरोह में अलग-अलग लोगों की थी भूमिका
जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि गिरोह के सदस्यों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। कुछ लोग वाहन चोरी करते थे, जबकि अन्य पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने, चोरी की गाड़ियों को दूसरे स्थानों तक पहुंचाने और उनकी बिक्री की जिम्मेदारी होने का आरोप है।
मणिपुर तक पहुंचाई गईं गाड़ियां
जांच में कुछ चोरी के वाहनों को मणिपुर क्षेत्र तक पहुंचाए जाने की बात भी सामने आई है। पुलिस अब नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका और चोरी की गाड़ियों के पूरे रूट का पता लगाने में जुटी है।
हालांकि, पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
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