मां दुर्गा की आराधना के लिए शारदीय नवरात्रि का पर्व सबसे शुभ माना जाता है। इस दौरान दुर्गा मां के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। इसी कड़ी में दूसरा दिन देवी मां के ब्रह्मचारिणी रूप को समर्पित किया गया है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार जो व्यक्ति मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं उनमें वैराग्य, तप, संयम, सदाचार की वृद्धि होती है। उस व्यक्ति का मन कठिन से कठिन परिस्थिति में भी नहीं डगमगाता। कहा जाता है मां ब्रह्मचारिणी अपने भक्तों के दुर्गणों, मलिनता और दोषों को दूर कर देती हैं।
मां ब्रह्मचारिणी को भोग में चीनी या गुड़ अर्पित करना बेहद शुभ माना गया है। ऐसा करने से व्यक्ति को लंबी उम्र का वरदान मिलता है, ऐसा माना जाता है कि आप गुड़ या चीनी से बनी मिठाई का भोग भी लगा सकते हैं।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मां दुर्गा का जन्म पार्वती के रूप में पर्वतराज के यहां हुआ था। देवर्षि नारद के कहने पर ही माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या की थी। हजारों वर्षों के कठोर तप के कारण ही इनका नाम तपश्चारिणी या ब्रह्मचारिणी पड़ा। मान्यता है कि माता पार्वती ने कठिन तप में कई वर्षों तक निराहार और अत्यन्त कठोर तप करके भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया।
मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र-
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
दधाना कपाभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
: मां दुर्गा के 51 शक्तिपीठ :——
यहाँ 51 शक्तिपीठों के नाम और स्थान दिए गए हैं ~
कामाख्या देवी —- गुवाहाटी, असम।
त्रिपुरा सुंदरी —– उदयपुर, त्रिपुरा।
सुंदरी देवी — शोंढेश, बलूचिस्तान, पाकिस्तान।
हिंगलाज देवी —- बलूचिस्तान, पाकिस्तान।
कालीघाट काली मंदिर —- कोलकाता, पश्चिम बंगाल।
तारा देवी —– नीमराना, राजस्थान।
श्री शैल —- श्रीशैलम, आंध्र प्रदेश।
महालक्ष्मी —– कोल्हापुर, महाराष्ट्र।
वीरजा देवी —– ओडिशा।
मंगलचण्डिका —– प्रयागराज, उत्तर प्रदेश।
सती देवी —– कैलाश पर्वत, तिब्बत।
भद्रकाली —– कुरुक्षेत्र, हरियाणा।
विमला देवी —– पुरी, ओडिशा।
ललिता देवी —- प्रयाग, उत्तर प्रदेश।
क्षीर भवानी —– श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर।
महामाया देवी —– अमरकंटक, मध्य प्रदेश।
जयंती देवी —– जयंतिया हिल्स, मेघालय।
गंडकी चण्डिका —– पोखरा, नेपाल।
वाराही देवी —- पुष्कर, राजस्थान।
शारदा देवी —– मैसूर, कर्नाटक।
अम्बा देवी —- अम्बाजी, गुजरात।
कालिका —– कालिका मंदिर, पावागढ़, गुजरात।
कुमारी देवी —– कन्याकुमारी, तमिलनाडु।
महेश्वरी देवी —– महेश्वर, मध्य प्रदेश।
शांभवी —– शक्तिपीठ, बंगलोर, कर्नाटक।
चंद्रघंटा —– चंद्रनाथ पर्वत, त्रिपुरा।
शिरोराज्नी —– तृप्ति, ओडिशा।
नारायणी —– नलहाटी, पश्चिम बंगाल।
मंगलचण्डिका —– गया, बिहार।
भ्रामरी देवी —— त्रिशूल पर्वत, उत्तराखंड।
विन्ध्यवासिनी —— मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश।
ललिता देवी —— प्रयागराज, उत्तर प्रदेश।
श्रीशैलम मल्लिकार्जुन —– आंध्र प्रदेश।
महालक्ष्मी देवी —- कोल्हापुर, महाराष्ट्र।
महालक्ष्मी —– वाइ, महाराष्ट्र।
भ्रामरी देवी —- कानकाली, राजस्थान।
गंधमादन पर्वत —— हरिद्वार, उत्तराखंड।
भीमाशंकर —– पुणे, महाराष्ट्र।
कात्यायनी —– वैष्णो देवी, जम्मू और कश्मीर।
अंबाजी —– बनासकांठा, गुजरात।
कालीपीठ —– काली मंदिर, कालीघाट, कोलकाता।
त्रिपुरा भैरवी —– रांची, झारखंड।
मंगलचंडी —– मंगलचंडी, हरियाणा।
भद्रकाली —– कुरुक्षेत्र, हरियाणा।
वीरभद्रेश्वरी —- भद्राचलम, तेलंगाना।
अन्नपूर्णा —– वाराणसी, उत्तर प्रदेश।
चिंतपूर्णी —- चिंतपूर्णी, हिमाचल प्रदेश।
ज्वालामुखी —- ज्वालामुखी, हिमाचल प्रदेश।
तारा तारिणी —– ब्रह्मपुर, ओडिशा।
राजराजेश्वरी —– कांचीपुरम, तमिलनाडु।
कामेश्वरी —– कामाख्या, असम।
ये सभी शक्तिपीठ देवी के विभिन्न रूपों की पूजा स्थलों के रूप में महत्वपूर्ण हैं।







