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ट्रेन-मेट्रो पाबंदी पर SC पहुंचा मामला, कोर्ट बोला- सभी के हित देखने होंगे

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admin
9 अक्टूबर 2026 | 03:39 pm IST
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन के मद्देनजर रेल और मेट्रो सेवाओं पर लगाई गई पाबंदियों का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलील दी कि आशंकाओं के आधार पर सार्वजनिक परिवहन और नागरिकों की आवाजाही को पूरी तरह बाधित नहीं किया जा सकता। इस पर अदालत ने कहा कि किसी भी निर्देश से पहले यह देखना जरूरी है कि प्रदर्शन को कानूनी अनुमति मिली है या नहीं। पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के अधिकार के साथ-साथ आम जनता की सुविधाओं और सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या दलीलें दी गईं?

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी, प्रशांत भूषण, गोपाल शंकरनारायणन और वृंदा ग्रोवर पेश हुए।

सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने दलील दी कि दिल्ली में यातायात व्यवस्था बाधित हो गई है और नागरिकों की आवाजाही पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं। वहीं, अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि केवल आशंकाओं के आधार पर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बंद करना उचित नहीं है।

अदालत ने प्रदर्शन आयोजकों की पहचान और अनुमानित भीड़ से जुड़ी जानकारी मांगी। पीठ ने यह भी कहा कि किसी आंदोलन के अधिकार पर विचार करते समय आम नागरिकों की आवाजाही और उनकी सुविधाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

प्रदर्शन की अनुमति से जुड़ा आदेश तलब

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की ओर से प्रदर्शन की अनुमति खारिज किए जाने संबंधी आदेश की प्रति मांगी। पीठ ने संकेत दिया कि मामले में कोई भी निर्देश जारी करने से पहले सभी संबंधित पक्षों के हितों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है।

वहीं, अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता केवल निर्धारित स्थल पर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन की अनुमति चाहते हैं।

10 अक्टूबर को दिल्ली आने वाली कई ट्रेनें रद्द

इस बीच, भारतीय रेलवे ने 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे तक नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर पहुंचने वाली मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द करने का आदेश जारी किया है।

9 अक्टूबर के रेलवे आदेश के अनुसार, शुक्रवार दोपहर 2 बजे के बाद अपने शुरुआती स्टेशनों से रवाना होने वाली और निर्धारित समयावधि में दिल्ली के संबंधित स्टेशनों पर पहुंचने वाली ट्रेनें शुरुआती स्टेशन से ही रद्द की जानी थीं।

रेलवे ने इस फैसले के पीछे स्टेशनों के आसपास संभावित भारी यातायात जाम की आशंका बताई है। इस कदम से दिल्ली पहुंचने वाले यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

57 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने का अनुरोध

दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) से 57 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने का अनुरोध किया है।

मेट्रो से संबंधित पाबंदियों के लिए दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ट्रांसपोर्ट रेंज) के कार्यालय से 8 अक्टूबर को जारी पत्र में जंतर-मंतर और नई दिल्ली जिले के अन्य स्थानों पर प्रस्तावित प्रदर्शनों का उल्लेख किया गया था।

SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन

ये पाबंदियां मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले लगाई गई हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के साथ कई छात्र और युवा संगठनों की ओर से इस विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया गया है।

रेलवे और मेट्रो सेवाओं को लेकर उठाए गए कदमों पर अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सवाल उठे हैं। मामले में अदालत के सामने एक ओर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और दूसरी ओर सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात प्रबंधन तथा आम लोगों की आवाजाही के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।