भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को शानदार रिकवरी देखने को मिली। सेंसेक्स में 800 से अधिक अंकों का उछाल आया, जबकि निफ्टी 50 भी 22,500 के स्तर के करीब पहुंच गया। गुरुवार की भारी गिरावट के बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर शेयरों की खरीदारी की, जिससे बाजार को मजबूती मिली।
खास बात यह रही कि अमेरिकी प्रशासन की ओर से कई बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के PERM (Permanent Labor Certification) कार्यक्रम पर कार्रवाई की खबरों के बावजूद IT शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली। निवेशकों की चिंता के बीच कंपनियों की सफाई, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के तिमाही नतीजों और कम कीमत पर शेयर खरीदने की रणनीति ने बाजार की धारणा को बेहतर बनाने में मदद की।
सुबह करीब 10:11 बजे BSE सेंसेक्स 804.11 अंक यानी 1.12% की बढ़त के साथ 72,397.35 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 50 करीब 264.15 अंक यानी 1.19% चढ़कर 22,495.95 पर पहुंच गया। व्यापक बाजार में भी तेजी देखने को मिली। निफ्टी 100 में 1.16%, निफ्टी 200 में 1.21% और निफ्टी 500 में 1.12% की बढ़त दर्ज की गई। मिडकैप शेयरों में भी खरीदारी रही, जबकि स्मॉलकैप शेयरों में अपेक्षाकृत सीमित तेजी देखने को मिली।
बाजार में तेजी की 3 बड़ी वजहें
IT शेयरों में जोरदार खरीदारी
शुक्रवार की तेजी में IT सेक्टर ने अहम भूमिका निभाई। शुरुआती कारोबार में निफ्टी IT इंडेक्स 3.02% चढ़कर 28,574.85 पर पहुंच गया। TCS के शेयरों में 4.98%, इन्फोसिस में 3.07%, विप्रो में 3.23% और टेक महिंद्रा में 2.13% की बढ़त दर्ज की गई। वहीं, कोफोर्ज, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, एमफैसिस और HCLTech के शेयर भी बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे।
अमेरिकी प्रशासन की ओर से PERM कार्यक्रम को लेकर की गई कार्रवाई के बाद IT कंपनियों पर दबाव बढ़ने की आशंका थी। हालांकि, कंपनियों की ओर से इस प्रक्रिया पर अपनी निर्भरता को लेकर दी गई जानकारी से निवेशकों को संभावित असर का आकलन करने में मदद मिली।
TCS ने शुक्रवार को स्टॉक एक्सचेंजों को बताया कि पिछले दो वर्षों में उसके PERM आवेदन की संख्या एकल अंक में रही है। कंपनी ने कहा कि उसे इस कार्रवाई से अपनी कार्यबल रणनीति या ग्राहकों के साथ जुड़ाव पर असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। कंपनी ने अमेरिका में अगले पांच वर्षों के दौरान 15,000 और कर्मचारियों की भर्ती की योजना भी दोहराई।
माइक्रोसॉफ्ट ने भी अपने H-1B वीजा आवेदनों को लेकर सफाई दी है। हालांकि, H-1B वीजा और PERM ग्रीन कार्ड प्रक्रिया अलग-अलग हैं। अमेरिकी कार्रवाई का संबंध विशेष रूप से स्थायी श्रम प्रमाणन आवेदन से है।
गुरुवार की गिरावट के बाद बार्गेन बाइंग
शुक्रवार को बाजार में तेजी की दूसरी बड़ी वजह बार्गेन बाइंग यानी गिरावट के बाद अपेक्षाकृत कम कीमत पर शेयर खरीदना रही।
गुरुवार को सेंसेक्स 1,045.46 अंक यानी 1.44% गिरकर 71,593.24 पर बंद हुआ था। वहीं, निफ्टी 371.25 अंक यानी 1.64% टूटकर 22,231.80 पर आ गया था।
इस तेज गिरावट के बाद कई शेयरों की कीमतें नीचे आ गईं। ऐसे में कुछ निवेशकों ने उन कंपनियों के शेयर खरीदने का मौका देखा, जिनमें उन्हें लंबी अवधि में वृद्धि की संभावना नजर आती है। बाजार की भाषा में इसे ‘बायिंग द डिप’ भी कहा जाता है।
गिरावट के बाद नई खरीदारी से शेयरों की कीमतों को सहारा मिल सकता है। इसके साथ ही शॉर्ट कवरिंग भी तेजी को बढ़ा सकती है। इसमें कीमतें गिरने की उम्मीद पर ट्रेड करने वाले निवेशक अपनी पोजीशन बंद करने के लिए शेयर खरीदते हैं। हालांकि, बाजार में आई तेजी से यह सुनिश्चित नहीं होता कि आगे भी लगातार बढ़त बनी रहेगी।
TCS के मजबूत तिमाही नतीजों से मिला सहारा
TCS के सितंबर तिमाही के नतीजों ने भी IT सेक्टर के प्रति निवेशकों की धारणा को बेहतर बनाने में मदद की। कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में 13,884 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो एक साल पहले के 12,075 करोड़ रुपये से लगभग 15% अधिक था।
कंपनी का राजस्व सालाना आधार पर 11.2% बढ़कर 73,188 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसके अलावा, TCS ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से होने वाले राजस्व में भी वृद्धि की जानकारी दी। कंपनी के मुताबिक, AI से प्राप्त वार्षिक राजस्व की रन रेट तिमाही आधार पर लगभग 20% बढ़कर 3.1 अरब डॉलर हो गई, जबकि पिछली तिमाही में यह 2.6 अरब डॉलर थी।
कंपनी ने तिमाही के दौरान 9.6 अरब डॉलर की कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू भी दर्ज की। निवेशकों के लिए ये आंकड़े कारोबार की स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का आकलन करने में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। IT कंपनियों के लिए AI आधारित सेवाएं तेजी से अहम हो रही हैं, क्योंकि ग्राहक ऑटोमेशन और नई तकनीकों पर खर्च बढ़ा रहे हैं।







