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Nayyi Navelli Review: फैमिली ड्रामा दमदार, अनुराग ठाकुर ने लूटी महफिल

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admin
21 अक्टूबर 2026 | 04:04 pm IST
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स्टार रेटिंग: 2/5

निर्देशक: बालाजी मोहन
मुख्य कलाकार: यामी गौतम धर, अनुराग ठाकुर, आदिनाथ एम. कोठारे, सुनीता राजवार और मीता वशिष्ठ

खास बात: अनुराग ठाकुर की शानदार कॉमिक टाइमिंग और शुरुआती फैमिली ड्रामा फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं।

कमजोरी: कमजोर पटकथा, अतार्किक पौराणिक प्रसंग और औसत विजुअल इफेक्ट्स फिल्म का प्रभाव कम करते हैं।

कैसी है ‘नयी नवेली’ की कहानी?

झगड़ों से भरा एक परिवार, नई-नई शादी करके घर आई दुल्हन और उसका देवर, जिसे लगता है कि कुछ तो गड़बड़ है। फिल्म ‘नयी नवेली’ में एक मनोरंजक हॉरर-कॉमेडी बनने की पूरी संभावना नजर आती है। निर्देशक बालाजी मोहन ने कहानी की शुरुआत पारिवारिक ड्रामे, हास्य और अजीबोगरीब परिस्थितियों के साथ की है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या फिल्म अंत तक दर्शकों का मनोरंजन बनाए रख पाती है?

यामी गौतम धर ने मोहिनी का किरदार निभाया है, जो शादी के बाद मेरठ स्थित अपने नए घर में आती है। वहीं, उसका देवर बंटू (अनुराग ठाकुर) इस बात को लेकर आश्वस्त है कि मोहिनी जैसी दिखाई देती है, वास्तव में वैसी नहीं है। फिल्म के शुरुआती हिस्से में इसी शक और परिवार के सदस्यों की प्रतिक्रियाओं से हास्य पैदा होता है।

घर-परिवार की नोकझोंक, आपसी गलतफहमियां और रिश्तों की खींचतान कहानी को सहज बनाते हैं। फिल्म की कॉमेडी भी इन्हीं दृश्यों में सबसे ज्यादा असरदार नजर आती है।

अनुराग ठाकुर की कॉमिक टाइमिंग ने जीता दिल

फिल्म में अनुराग ठाकुर का प्रदर्शन सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। बंटू के किरदार में उनकी स्वाभाविक कॉमिक टाइमिंग और संवाद अदायगी कई साधारण दृश्यों को भी मजेदार बना देती है। जब कहानी के चुटकुले असर नहीं छोड़ पाते, तब भी अनुराग अपने अभिनय से दर्शकों को बांधे रखने की कोशिश करते हैं।

उनके किरदार का और बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता था, लेकिन सीमित अवसरों के बावजूद वह अपनी छाप छोड़ने में सफल रहते हैं। फिल्म के शुरुआती हिस्से में उनका अभिनय मनोरंजन का प्रमुख आधार बनता है।

पौराणिक मोड़ ने कमजोर की कहानी

कहानी में मोड़ तब आता है, जब ‘काल शील’ नाम के एक पत्थर का जिक्र होता है, जिसका संबंध रामायण और रावण की पौराणिक कथाओं से जोड़ा गया है। इसके बाद फिल्म का ध्यान पारिवारिक ड्रामे से हटकर अलौकिक संघर्ष की ओर चला जाता है।

यहीं फिल्म अपनी सबसे बड़ी कमजोरी उजागर करती है। जिस पारिवारिक माहौल और हास्य ने शुरुआत में दर्शकों को आकर्षित किया था, वह धीरे-धीरे पीछे छूट जाता है। पौराणिक और अलौकिक घटनाक्रम कहानी को नया आयाम देने के बजाय उसके प्रवाह में रुकावट पैदा करता है।

लेखन और निर्देशन में दिखी खामियां

पौराणिक कथाओं को कॉमेडी के साथ जोड़ना अपने आप में गलत विचार नहीं है, लेकिन ‘नयी नवेली’ में दोनों के बीच संतुलन कायम नहीं हो पाता। जब पारिवारिक दृश्यों में कहानी अपनी लय पकड़ने लगती है, तभी फिल्म दूसरी दिशा में मुड़ जाती है।

कई घटनाएं ऐसी हैं, जिनका आपसी संबंध स्पष्ट नहीं हो पाता। राजा का सड़क के दूसरी तरफ होना, किरदारों की उम्र को लेकर उलझन, दशहरे से पहले दिवाली का आ जाना और हनुमान से जुड़ा प्रसंग कहानी को कई जगह अतार्किक बनाते हैं।

निर्देशक बालाजी मोहन इन घटनाओं को प्रभावी ढंग से जोड़ने में सफल नहीं रहे। परिणामस्वरूप, फिल्म में कुछ मनोरंजक पल होने के बावजूद कहानी एक सुसंगत रूप नहीं ले पाती।

AI विजुअल इफेक्ट्स ने किया निराश

फिल्म में पौराणिक दृश्यों को दिखाने के लिए इस्तेमाल किए गए AI-निर्मित विजुअल्स भी खास प्रभाव नहीं छोड़ते। कई दृश्य बनावटी और रचनात्मकता से दूर महसूस होते हैं। अलौकिक दुनिया को विश्वसनीय बनाने के बजाय ये दृश्य दर्शकों को फिल्म की कृत्रिमता का एहसास कराते हैं।

पौराणिक प्रसंगों को कहानी के साथ स्वाभाविक रूप से जोड़ने के बजाय फिल्म उन पर जरूरत से ज्यादा निर्भर दिखाई देती है। इससे कहानी की विश्वसनीयता और मनोरंजन, दोनों प्रभावित होते हैं।

यामी गौतम और बाकी कलाकारों का अभिनय

यामी गौतम धर के किरदार मोहिनी के पास कहानी के केंद्र में होने के बावजूद अपनी छाप छोड़ने के पर्याप्त अवसर नहीं हैं। उनके किरदार को गहराई से विकसित नहीं किया गया, जिसके कारण अलग-अलग परिस्थितियों में भी उनका अभिनय कई जगह एक जैसा महसूस होता है।

इसे केवल अभिनेत्री की कमी नहीं कहा जा सकता, क्योंकि कमजोर पटकथा भी उनके किरदार की संभावनाओं को सीमित करती है। फिल्म को एक अधिक प्रभावशाली मुख्य किरदार की जरूरत थी।

आदिनाथ एम. कोठारे ने राजा के किरदार में भावनात्मक दृश्यों के दौरान अपनी क्षमता दिखाई है, लेकिन उन्हें भी पर्याप्त अवसर नहीं मिलते। सुनीता राजवार और मीता वशिष्ठ पारिवारिक दृश्यों में सहजता लाती हैं। हालांकि, बाकी कलाकारों के किरदारों को ज्यादा विस्तार नहीं दिया गया है।

परिवार में कई सदस्य होने के बावजूद फिल्म उनके रिश्तों और आपसी समीकरणों का इस्तेमाल मुख्य रूप से गलतफहमियां पैदा करने तक सीमित रखती है।

तकनीकी पक्ष और संगीत

तकनीकी स्तर पर भी फिल्म कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ती। कुछ विजुअल इफेक्ट्स कमजोर नजर आते हैं, जिससे अलौकिक घटनाओं का असर कम हो जाता है। संगीत भी कहानी के माहौल को खास मजबूती नहीं देता और कोई गीत लंबे समय तक याद रहने वाला अनुभव नहीं बन पाता।

करीब 2 घंटे 18 मिनट की इस फिल्म को थोड़ा छोटा और ज्यादा चुस्त बनाया जा सकता था। समस्या सिर्फ इसकी लंबाई नहीं, बल्कि उन दृश्यों की भी है, जो कहानी को आगे बढ़ाने में खास योगदान नहीं देते।

एक बेहतर संपादन और कसी हुई पटकथा फिल्म के मनोरंजन को काफी हद तक बढ़ा सकती थी।

अंतिम फैसला: देखें या नहीं?

‘नयी नवेली’ में एक अच्छी हॉरर-कॉमेडी बनने की क्षमता थी। अगर फिल्म अपने मजबूत पक्ष यानी पारिवारिक ड्रामे और हास्य पर अधिक ध्यान देती, तो इसका प्रभाव बेहतर हो सकता था। कमजोर लेखन, बिखरी हुई कहानी और अलौकिक प्रसंगों के असंतुलित इस्तेमाल ने इसकी संभावनाओं को सीमित कर दिया है।

रेटिंग: 2/5 स्टार

अगर आप अनुराग ठाकुर की कॉमिक टाइमिंग और हल्के-फुल्के पारिवारिक मनोरंजन के शौकीन हैं, तो फिल्म को एक बार देख सकते हैं। हालांकि, मजबूत कहानी, तार्किक घटनाक्रम और प्रभावशाली हॉरर-कॉमेडी की उम्मीद रखने वाले दर्शकों को निराशा हो सकती है।