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4 अक्टूबर: मातृ नवमी श्राद्ध में न करें ये गलतियां

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admin
1 अक्टूबर 2026 | 10:31 am IST
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पितृ पक्ष के 16 दिनों में मातृ नवमी का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस तिथि पर परिवार की दिवंगत महिलाओं—जैसे माता, दादी, नानी और अन्य महिला पूर्वजों—का श्राद्ध एवं तर्पण किया जाता है। इस वर्ष मातृ नवमी 4 अक्टूबर को पड़ रही है।

मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से श्राद्ध करने से महिला पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं कुछ ऐसे कार्य भी बताए गए हैं, जिन्हें मातृ नवमी के दिन करने से बचने की सलाह दी जाती है।

तामसिक भोजन से करें परहेज

पितृ पक्ष के दौरान सात्विक भोजन करने की परंपरा है। विशेष रूप से मातृ नवमी के दिन मांसाहार, शराब और तामसिक भोजन से बचना चाहिए। कई धार्मिक परंपराओं में इस दिन प्याज और लहसुन का सेवन भी वर्जित माना गया है।

श्राद्ध के लिए तैयार किया गया भोजन पूरी तरह शुद्ध और सात्विक रखने की परंपरा है।

महिलाओं का अपमान न करें

मातृ नवमी महिला पूर्वजों को समर्पित तिथि मानी जाती है। ऐसे में इस दिन किसी महिला का अपमान करना, कठोर शब्द कहना या उसके साथ दुर्व्यवहार करना अनुचित माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, परिवार के बड़े-बुजुर्गों और महिलाओं का सम्मान करना तथा उनका आशीर्वाद लेना शुभ माना जाता है।

बाल और नाखून काटने से बचें

श्राद्ध कर्म से जुड़ी परंपराओं में बाल और नाखून काटने से परहेज करने की सलाह दी जाती है। विशेष रूप से जिस परिवार में मातृ नवमी के दिन श्राद्ध कर्म किया जा रहा हो, वहां इस नियम का पालन करने की परंपरा रही है।

श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को इस दिन सादगी और संयम बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

भोजन का अपमान न करें

मातृ नवमी के दिन भोजन की बर्बादी या उसका अपमान नहीं करना चाहिए। श्राद्ध में तैयार भोजन को श्रद्धापूर्वक अर्पित करने के बाद जरूरतमंदों, ब्राह्मणों या अन्य लोगों को भोजन कराने की परंपरा है।

कुछ परंपराओं में पंचबलि निकालने का भी विधान बताया गया है। भोजन बनाते समय साफ-सफाई और शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

नई वस्तुओं की खरीदारी से बचें

पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण और श्रद्धा का समय माना जाता है। इसी कारण कई परिवार इस अवधि में नए कपड़े, आभूषण या अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी से बचते हैं।

मातृ नवमी के दिन भी नई वस्तु खरीदने या किसी बड़े शुभ कार्य की शुरुआत करने के बजाय पूर्वजों के तर्पण, दान और स्मरण को प्राथमिकता देने की परंपरा है।

श्रद्धा और सम्मान सबसे महत्वपूर्ण

मातृ नवमी के दिन सबसे महत्वपूर्ण है कि दिवंगत महिला पूर्वजों को श्रद्धा से याद किया जाए। तर्पण, श्राद्ध, दान और भोजन कराते समय मन में सम्मान और कृतज्ञता का भाव रखने को धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व दिया गया है।