केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने विदेशों में काम कर रहे भारतीय वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को देश वापस लाने की जरूरत पर जोर दिया। बर्लिन में भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के शोधार्थियों से बातचीत के दौरान उन्होंने चीन की प्रतिभाओं को वापस लाने की नीति का उल्लेख किया। इसी चर्चा के दौरान उन्होंने CJP नेता अभिजीत दिपके का नाम लेते हुए टिप्पणी की और कहा कि भारत को अपनी नीतियां लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप तैयार करनी होंगी।
भारतीय प्रतिभाओं को वापस लाने पर जोर
पीयूष गोयल से पूछा गया था कि क्या भारत विदेशों में काम कर रहे शीर्ष वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों को वापस लाने के लिए चीन की तर्ज पर कोई सरकारी कार्यक्रम शुरू कर सकता है।
इस पर उन्होंने कहा कि भारत को अपनी वैश्विक प्रतिभा को वापस लाने के रास्ते तलाशने चाहिए। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी योजनाएं देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मूल्यों के अनुरूप हों।
अभिजीत दिपके का नाम लेकर क्या बोले गोयल?
चर्चा के दौरान पीयूष गोयल ने CJP नेता अभिजीत दिपके का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी सरकारी योजनाओं पर कुछ लोग सवाल उठा सकते हैं। उन्होंने टिप्पणी की कि ऐसे लोग कह सकते हैं कि छात्रों को वित्तीय सहायता और छात्रवृत्ति देना सरकार की जिम्मेदारी है, तो इसके लिए अलग से कार्यक्रम चलाने की क्या जरूरत है।
गोयल ने कहा कि इस तरह की आलोचनाओं के बावजूद भारत को अपनी नीतियां लोकतंत्र के नजरिए से तैयार करनी होंगी। उनका जोर इस बात पर था कि देश में प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें वापस लाने के लिए योजनाएं बनाते समय लोकतांत्रिक मूल्यों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
चीन की प्रतिभा वापसी नीति का किया उल्लेख
पीयूष गोयल ने चीन के उन प्रयासों का उल्लेख किया, जिनके तहत विदेशों में काम कर रहे वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं, विशेषकर चीनी मूल के शिक्षाविदों को वापस बुलाकर देश की नवाचार क्षमता मजबूत करने की कोशिश की जाती है।
उन्होंने इस पहल को उपयोगी बताते हुए कहा कि भारत को चीन की राजनीतिक व्यवस्था और अपने लोकतांत्रिक ढांचे के बीच अंतर समझना होगा। उनके मुताबिक, किसी दूसरे देश की नीति को अपनाने से पहले यह देखना जरूरी है कि वह भारत की परिस्थितियों के अनुकूल है या नहीं।
सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग पर भी उठाया सवाल
गोयल ने सरकारी वित्तपोषण से चलने वाले प्रतिभा कार्यक्रमों के संभावित दुरुपयोग को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने चीन की व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां ऐसी योजनाओं के दुरुपयोग को लेकर लोगों के मन में आशंकाएं हो सकती हैं।
उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि यदि भारत में कोई ऐसी योजना का गलत इस्तेमाल करता है, तो इसके लिए उन्हें जवाबदेह ठहराया जा सकता है। उनकी टिप्पणी का मुख्य संदेश यह था कि भारत को प्रतिभाओं को आकर्षित करने वाली प्रभावी योजनाएं बनानी चाहिए, लेकिन उनकी निगरानी और जवाबदेही लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए।







