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मन की बात के 139वें एपिसोड में PM मोदी ने गिनाईं देश की उपलब्धियां

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admin
25 अक्टूबर 2026 | 01:41 pm IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे सकारात्मक प्रयासों, स्थानीय उत्पादों, प्राकृतिक खेती, स्वास्थ्य सेवाओं, विज्ञान और सामाजिक योगदान से जुड़ी कई उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के आम लोगों की मेहनत, समर्पण और सेवा भावना भारत की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

12 साल से जारी है ‘मन की बात’ का सफर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 12 साल पहले विजयदशमी के शुभ अवसर पर ‘मन की बात’ कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी। तब से यह यात्रा लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि इस दौरान देशवासियों ने उनका साथ दिया और अपने सुझावों के माध्यम से उन्हें दिशा भी दिखाई।

पीएम मोदी के मुताबिक, ‘मन की बात’ उनके लिए देश के आम लोगों की मेहनत, हिम्मत, लगन, समर्पण और सेवा भावना को सामने लाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है।

उन्होंने भारत की सदियों पुरानी तीर्थयात्रा परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि उनके लिए ‘मन की बात’ भी किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं है। यह देशवासियों के प्रयासों को करीब से जानने और उनके योगदान को सम्मान देने का अवसर है।

पंजाब में प्राकृतिक खेती से कपास उत्पादन को बढ़ावा

पीएम मोदी ने पंजाब की संस्था ‘खेती विरासत मिशन’ की पहल का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यह संस्था प्राकृतिक खेती और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है।

संस्था की टीम ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में प्राकृतिक तरीके से कपास की खेती को प्रोत्साहित करने की पहल की, जिसे ‘नव-त्रिंजन’ नाम दिया गया।

इस पहल के तहत बिना रासायनिक पदार्थों के प्राकृतिक तरीके से कपास उगाने पर जोर दिया जा रहा है। प्राकृतिक रंगों वाली कपास के उत्पादन से ऐसे धागे और कपड़े तैयार करने में मदद मिलती है, जिन्हें रंगने के लिए अलग से रासायनिक रंगों की जरूरत नहीं पड़ती।

टिहरी गढ़वाल में लोगों ने हेवल नदी को दिया नया जीवन

प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी को बचाने के लिए किए गए सामूहिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले नदी में पानी कम होने लगा था और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोत भी सूख रहे थे।

इस स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर नदी को बचाने का अभियान शुरू किया। इसके तहत बारिश के पानी को रोकने, भूजल स्तर सुधारने और बड़े पैमाने पर पौधे लगाने जैसे प्रयास किए गए।

पीएम मोदी के अनुसार, इन पहलों से हेवल नदी को नया जीवन देने में मदद मिली। साथ ही, क्षेत्र के कई प्राकृतिक जलस्रोतों को फिर से सक्रिय करने में भी सफलता मिली।

‘वोकल फॉर लोकल’ से विदेशी बाजारों तक पहुंच रहे भारतीय उत्पाद

पीएम मोदी ने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में मदद कर रही है। उन्होंने बिहार के पूर्णिया के मखाने और कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल का उदाहरण दिया।

उन्होंने बताया कि पूर्णिया का मखाना ग्रीस तक पहुंच रहा है, जबकि कलबुर्गी की अरहर दाल मालदीव में अपनी जगह बना रही है।

प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों का भी उल्लेख किया। ‘शबरी नेचुरल्स’ के माध्यम से शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पाद बाजार तक पहुंचाए जा रहे हैं।

इन उत्पादों की पैकेजिंग में आदिवासी कला और संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। कार्यक्रम में बताया गया कि इस पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित ‘गुड डिजाइन अवॉर्ड’ भी मिल चुका है।

ई-संजीवनी से दूरदराज के इलाकों में आसान हो रहा इलाज

प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल स्वास्थ्य सेवा ‘ई-संजीवनी’ के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों में मरीजों को मिल रही चिकित्सा सहायता का जिक्र किया।

उन्होंने अंडमान-निकोबार के बाराटांग द्वीप में जरावा जनजाति के सात वर्षीय बच्चे ओहो-तहाने का उदाहरण दिया। बच्चे को तेज बुखार और सांस लेने में परेशानी हो रही थी। स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों ने ई-संजीवनी के जरिए विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क किया। जांच में बच्चे को निमोनिया होने की जानकारी मिली और विशेषज्ञ की देखरेख में उसका इलाज किया गया।

पीएम मोदी ने लक्षद्वीप के कवरत्ती और कालपेनी से जुड़े उदाहरण भी साझा किए। उन्होंने बताया कि कालपेनी में 60 वर्षीय कुन्ही कोया की तबीयत अचानक बिगड़ने पर विशेषज्ञ डॉक्टरों ने स्थानीय चिकित्सा टीम को जरूरी सलाह दी, जिससे उन्हें राहत मिली।

इन उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने बताया कि डिजिटल तकनीक दूरदराज के क्षेत्रों में भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मददगार साबित हो रही है।

IIT मद्रास के ब्रेन सेंटर की तकनीक का किया उल्लेख

प्रधानमंत्री मोदी ने IIT मद्रास में स्थापित ‘सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर’ का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस केंद्र में मानव मस्तिष्क की विस्तृत डिजिटल 3D तस्वीरें तैयार करने की तकनीक विकसित की गई है।

इस तकनीक के जरिए मस्तिष्क की संरचना को बारीकी से समझने और उसका अध्ययन करने में मदद मिल सकती है। कार्यक्रम में 100 मानव मस्तिष्कों के 3D नक्शे तैयार कर उनका विस्तृत अध्ययन करने के लक्ष्य का भी उल्लेख किया गया।

पीएम मोदी ने विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में ऐसी पहलों को महत्वपूर्ण बताया, क्योंकि इनसे भविष्य में मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों को समझने और चिकित्सा अनुसंधान को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

‘फाइबर ऑप्टिक्स के जनक’ नरिंदर सिंह कपानी को किया याद

प्रधानमंत्री मोदी ने महान वैज्ञानिक नरिंदर सिंह कपानी को याद करते हुए कहा कि 31 अक्टूबर को उनकी 100वीं जयंती मनाई जाएगी। कपानी को दुनिया में ‘फाइबर ऑप्टिक्स के जनक’ के रूप में जाना जाता है। उनका जन्म पंजाब के मोगा जिले में हुआ था।

प्रकाश को बेहद पतले रेशों के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने वाली तकनीक पर उनके काम ने संचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

पीएम मोदी ने कहा कि आज इंटरनेट और डिजिटल संचार की दुनिया में फाइबर ऑप्टिक्स की अहम भूमिका है। उन्होंने युवाओं से नरिंदर सिंह कपानी जैसे वैज्ञानिकों के जीवन और योगदान के बारे में पढ़ने तथा उनसे प्रेरणा लेने की अपील की।

मेघालय में बाजरे से बने उत्पादों की बढ़ रही मांग

प्रधानमंत्री मोदी ने मेघालय के वेस्ट जैंतिया हिल्स जिले के खांडुली गांव में बाजरे से जुड़े प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यहां कई पीढ़ियों से बाजरा स्थानीय खानपान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, लेकिन कुछ समय से इसकी खेती करने वाले किसानों की संख्या घटने लगी थी।

इस स्थिति को बदलने के लिए गांव के दो दोस्तों ने बाजरे से नए उत्पाद तैयार करने की पहल की। उन्होंने बाजरे से कुकीज, केक, मफिन और बच्चों के लिए खाद्य पदार्थ बनाने पर ध्यान दिया।

इन नए उत्पादों के कारण बाजरे की मांग बढ़ने लगी और स्थानीय स्तर पर इसकी खेती को भी प्रोत्साहन मिलने लगा। यह पहल पारंपरिक अनाज को आधुनिक बाजार से जोड़ने का उदाहरण है।

रामायण से मिलती है सेवा, दया और एकता की सीख

पीएम मोदी ने महर्षि वाल्मीकि की रामायण का उल्लेख करते हुए कहा कि यह ग्रंथ जीवन के कई महत्वपूर्ण मूल्यों की सीख देता है। रामायण हमें निरंतर प्रयास करने के साथ-साथ सेवा, दया और समाज में मिल-जुलकर रहने का संदेश भी देती है।

उन्होंने भगवान राम के जीवन से जुड़े प्रसंगों का जिक्र किया। भगवान राम ने माता शबरी की भक्ति और प्रेम को स्वीकार किया तथा निषादराज के साथ अपनी मित्रता को सम्मान दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सबको साथ लेकर आगे बढ़ने की भावना आज भी हमारा मार्गदर्शन करती है। रामायण में निहित ये मूल्य समाज में आपसी सम्मान और सहयोग को मजबूत बनाने की प्रेरणा देते हैं।

भाई परमानंद के योगदान को किया याद

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता सेनानी और आर्य समाज से जुड़े भाई परमानंद को भी याद किया। उन्होंने बताया कि 4 नवंबर को उनकी जयंती मनाई जाएगी।

भाई परमानंद 20वीं सदी की शुरुआत में आर्य समाज के कार्यों के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका गए थे। वहां उनकी मुलाकात महात्मा गांधी से भी हुई थी। उन्होंने गुयाना सहित विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदायों के बीच भी काम किया।

भाई परमानंद ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका संबंध गदर आंदोलन से भी रहा और वे गदर पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने उनके जीवन और योगदान का उल्लेख करते हुए देश के युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों के बारे में जानने और उनसे प्रेरणा लेने का संदेश दिया।

आम लोगों के प्रयासों को सामने लाने का माध्यम है ‘मन की बात’

‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राकृतिक खेती, नदी संरक्षण, स्थानीय उत्पादों, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं, वैज्ञानिक अनुसंधान और भारतीय संस्कृति से जुड़े कई उदाहरण साझा किए।

कार्यक्रम में प्रस्तुत इन उदाहरणों के जरिए उन्होंने स्थानीय स्तर पर हो रहे प्रयासों और आम लोगों के योगदान को रेखांकित किया। साथ ही, युवाओं को विज्ञान, सेवा, नवाचार और देश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने की प्रेरणा दी।