सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय रुपया मजबूत शुरुआत के साथ खुला। सोमवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 28 पैसे मजबूत होकर 96.25 के स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेतों ने रुपये को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और घरेलू शेयर बाजार में तेज खरीदारी का असर भी भारतीय मुद्रा पर सकारात्मक रूप से देखने को मिला।
शुरुआती कारोबार में कैसी रही रुपये की चाल?
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 96.18 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। कारोबार के दौरान शुरुआती बढ़त का कुछ हिस्सा कम होने के बाद यह 96.28 प्रति डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।
इसके बावजूद रुपया पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले 28 पैसे की मजबूती के साथ कारोबार करता रहा।
शुक्रवार को भी मजबूत होकर बंद हुआ था रुपया
इससे पहले शुक्रवार को भी रुपये में मजबूती देखने को मिली थी।
रुपया पिछले कारोबारी सत्र में 20 पैसे की बढ़त के साथ 96.53 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिला समर्थन
रुपये की मजबूती की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट रही।
अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 4.17% की गिरावट के साथ 92.74 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में कमी आमतौर पर रुपये के लिए सकारात्मक मानी जाती है।
डॉलर इंडेक्स में भी आई कमजोरी
छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स भी कमजोर हुआ।
डॉलर इंडेक्स 0.26% की गिरावट के साथ 101.04 पर आ गया, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं, खासकर रुपये, को समर्थन मिला।
घरेलू शेयर बाजार में खरीदारी का असर
विदेशी मुद्रा विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार में मजबूत खरीदारी के चलते भी रुपये को सहारा मिला।
हालांकि, बाजार के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने शुक्रवार को 3,892.77 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की थी। इसके बावजूद घरेलू निवेशकों की सक्रियता और वैश्विक सकारात्मक संकेतों ने बाजार का माहौल मजबूत बनाए रखा।
रुपये पर आगे क्या रहेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपये की चाल पर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी डॉलर की दिशा, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और विदेशी निवेशकों के निवेश रुख का सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा। यदि वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना रहता है, तो रुपये में मजबूती का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।







