भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला, अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 18-दिवसीय ऐतिहासिक मिशन के बाद जब धरती पर लौटे, तो सबसे भावुक क्षण वह था जब उन्होंने अपनी पत्नी कामना शुक्ला और 6 वर्षीय बेटे कियाश को गले लगाया। मिशन से लौटने के एक दिन बाद हुए इस पुनर्मिलन की तस्वीरों ने देशभर के लोगों को भावुक कर दिया।
सोशल मीडिया पर भावनात्मक झलक
शुभांशु ने इंस्टाग्राम पर वह क्षण साझा किया, जब वह दो महीने से ज्यादा समय बाद अपने प्रियजनों से मिले। उन्होंने लिखा:“अंतरिक्ष की उड़ान अद्भुत होती है, लेकिन अपने प्रियजनों को लंबे समय के बाद देखना भी उतना ही अद्भुत होता है… यह सचमुच घर जैसा एहसास था।”
भारत के पहले आईएसएस यात्री
शुभांशु शुक्ला अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पहुंचने वाले पहले भारतीय बने, और 1984 में राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय। वह 15 जुलाई को स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल से पृथ्वी पर लौटे।
पत्नी की तैयारी: घर का खाना और अंतरिक्ष की कहानियाँ
उनकी पत्नी कामना, बेटे कियाश के साथ पहले से ही ह्यूस्टन में मौजूद थीं। उन्होंने बताया,“उनकी सुरक्षित वापसी हमारे लिए एक उत्सव जैसा है। मैं उनके लिए घर के बने पसंदीदा व्यंजन तैयार कर रही हूँ, क्योंकि मुझे पता है कि अंतरिक्ष में रहते हुए उन्होंने इसकी कितनी कमी महसूस की होगी।”
पृथकवास में दूरी की मजबूरी
शुभांशु ने साझा किया कि पृथकवास के दौरान उन्हें अपने बेटे से 8 मीटर की दूरी बनाए रखनी पड़ती थी। उनका बेटा बार-बार पूछता था:“क्या मैं अपने हाथ धो सकता हूँ ताकि पापा को छू सकूं?”
यह परिवार के लिए बेहद कठिन समय था।
अंतरिक्ष से पहला कॉल: भावुक कर देने वाला क्षण
कामना ने कहा कि जब उन्हें अंतरिक्ष स्टेशन से शुभांशु का पहला फोन कॉल मिला, वह उनके लिए सबसे बड़ा आश्चर्य और राहत भरा क्षण था।“उनकी आवाज सुनना, और जानना कि वह सुरक्षित हैं, मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण था।”
शुक्स’ से ‘पोस्टर बॉय’ तक का सफर
कामना ने बताया कि शुभांशु का यह सफर कितना प्रेरणादायक रहा है।“एक शर्मीले लड़के से लेकर हज़ारों युवाओं को प्रेरित करने वाले आत्मविश्वासी अंतरिक्ष यात्री बनने तक का यह सफर बेहद भावुक कर देने वाला है।”अब वह अपने स्कूल – लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल – के नए ‘पोस्टर बॉय’ हैं।
राष्ट्रीय गौरव और निजी खुशी का संगम
कामना कहती हैं:“हमारा परिवार साथ बिताए गए निजी पलों को सहेजेगा। उनके लौटने से जो खुशी हमें मिली है, वह राष्ट्रीय गर्व और व्यक्तिगत प्रेम का सुंदर मिश्रण है।”







