एक हाईवे पर मूसलाधार बारिश हो रही थी। एक अमीर औरत की महँगी गाड़ी सुनसान रास्ते पर खराब हो गई। वह मदद के लिए परेशान खड़ी थी, लेकिन कोई नहीं रुक रहा था।
तभी वहाँ से एक पुरानी खटारा बाइक पर एक गरीब मैकेनिक गुज़रा। उसने अपनी बाइक रोकी और भीगते हुए उसकी गाड़ी ठीक कर दी। औरत ने उसे पैसे देने चाहे, तो मैकेनिक ने मुस्कुराकर मना कर दिया और कहा, “मैडम, मेरी माँ ने सिखाया है कि किसी मजबूर की मदद के पैसे नहीं लेते। अगर आप वाकई कुछ देना चाहती हैं, तो किसी और ज़रूरतमंद की मदद कर देना।”आगे जाकर वह औरत एक छोटे से रास्ते के ढाबे पर चाय पीने रुकी!!
वहाँ एक गर्भवती महिला मुस्कुराते हुए उसे चाय परोस रही थी!!
उस औरत को मैकेनिक की बात याद आई। चाय पीने के बाद उसने बिल चुकाया और टेबल पर चुपके से ₹5000 के नोट और एक पर्ची छोड़ दी।पर्ची पर लिखा था—“यह एक बहिन की तरफ से मदद है, मुझे किसी ने सिखाया है कि नेकी का कर्ज चुकाना चाहिए।
शाम को जब वह गर्भवती महिला थककर अपने घर पहुँची, तो उसने अपने पति को वह पैसे दिखाए। जानते हैं उसका पति कौन था? वही मैकेनिक जिसने सुबह हाईवे पर उस औरत की गाड़ी ठीक की थी!
आप दुनिया को जो देते हैं;
वही घूमकर आपके पास वापस आता है!!







