मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, प्रस्तावित छात्रावासों में छात्रों की सुरक्षा के साथ-साथ जरूरी बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
सत्य निकेतन हादसे के बाद सुरक्षा पर फोकस
यह योजना ऐसे समय सामने आई है जब हाल ही में सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद छात्र आवासों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी।
घटना के बाद दिल्ली में निजी PG और छात्र आवासों की सुरक्षा, उपलब्धता और सुविधाओं की समीक्षा तेज की गई है। सरकार अब छात्रों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित आवास विकल्प विकसित करने पर जोर दे रही है।
हॉस्टल के लिए सर्वे और जगहों की पहचान
सरकार ने छात्र आवास की जरूरतों का आकलन करने के लिए सर्वे कराने और संभावित स्थानों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। हॉस्टल निर्माण में विभिन्न सरकारी विभागों की भागीदारी होगी।
जरूरत के अनुसार हॉस्टल के लिए जमीन की व्यवस्था भी की जाएगी। सरकार का उद्देश्य बड़ी संख्या में छात्रों को सुरक्षित और व्यवस्थित आवास उपलब्ध कराना है।
PG संचालकों के लिए बनेगा डिजिटल पोर्टल
छात्र आवास व्यवस्था को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने के लिए दो डिजिटल पोर्टल विकसित करने की योजना भी है। इनमें एक पोर्टल छात्रों से जुड़ी जानकारी के लिए होगा, जबकि दूसरे के जरिए PG संचालकों का पंजीकरण किया जाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पोर्टल तैयार करने के लिए 15 दिन का लक्ष्य रखा गया है। इससे छात्रों और PG संचालकों से जुड़ी जानकारी को डिजिटल तरीके से व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
बाहर से आने वाले छात्रों को मिलेगा विकल्प
दिल्ली में उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में छात्र आते हैं। हॉस्टल योजना लागू होने के बाद इन विद्यार्थियों को सुरक्षित और व्यवस्थित आवास का अतिरिक्त विकल्प मिलने की उम्मीद है।
सरकार की योजना से छात्र आवास की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा।







