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Meta का बड़ा फैसला: बच्चों के यौन शोषण का डेटा सुरक्षा एजेंसियों से होगा साझा

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admin
15 सितंबर 2026 | 02:36 pm IST
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डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और हानिकारक कंटेंट को लेकर केंद्र सरकार के सख्त रुख के बाद टेक दिग्गज Meta बच्चों के यौन शोषण से जुड़े गंभीर मामलों की जानकारी भारत की कानून लागू करने वाली एजेंसियों (Law Enforcement Agencies) के साथ साझा करने पर सहमत हो गया है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में काम करने वाले किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक बुनियादी और गैर-समझौतावादी शर्त (Non-negotiable principle) है।

सरकारी सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी ANI ने बताया कि Meta बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की जानकारी संबंधित कानून लागू करने वाली एजेंसियों को देने पर सहमत हो गया है। सरकार के मुताबिक, यह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों को सुरक्षित रखने की दिशा में एक शुरुआती कदम है, हालांकि अभी इस दिशा में कई और कदम उठाए जाने बाकी हैं।

अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से भी बातचीत

सरकार की बातचीत केवल Meta तक सीमित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ भी लगातार चर्चा की जा रही है, ताकि बच्चों के लिए जोखिम पैदा करने वाले और अन्य हानिकारक कंटेंट की पहचान कर उसे जल्द हटाया जा सके।

सरकार ने संकेत दिया है कि जो प्लेटफॉर्म बच्चों को ऑनलाइन हानिकारक सामग्री से बचाने के लिए पर्याप्त सक्रिय कदम नहीं उठाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

NCPCR ने Meta India को किया था तलब

यह घटनाक्रम नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) की कार्रवाई के बाद सामने आया है। आयोग ने बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (CSEAM) से संबंधित विज्ञापनों के आरोपों को लेकर Meta के खिलाफ जांच शुरू की थी।

जांच के सिलसिले में Meta India के प्रमुख और कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर को NCPCR के समक्ष पेश होने के लिए तलब किया गया था। इसके बाद Meta India के प्रतिनिधि 9 सितंबर 2026 को आयोग के सामने पेश हुए।

NCPCR ने Meta के स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्म पर कथित विज्ञापनों से जुड़ी BBC Eye की एक रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया था। इसके बाद आयोग ने 3 जुलाई 2026 को Meta Platforms, Inc. को नोटिस जारी कर आरोपों पर जवाब मांगा था। Meta ने नोटिस मिलने के करीब एक सप्ताह बाद आयोग को अपना जवाब सौंप दिया था।

इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े कंटेंट की पहचान, रोकथाम और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया पर जांच और तेज हो गई।

Meta पर लगे आरोपों की NHRC जांच

इन आरोपों को लेकर नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) ने भी संज्ञान लिया है। आयोग ने दिल्ली पुलिस को उन दावों की व्यापक जांच करने का निर्देश दिया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि Meta के स्वामित्व वाले Instagram पर दिखाए जाने वाले पेड विज्ञापनों के जरिए भारत में Child Sexual Abuse Material (CSAM) को बढ़ावा दिया गया।

NHRC ने पुलिस से यह भी जांच करने को कहा कि क्या Meta और संबंधित अन्य संस्थाओं ने Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act के तहत निर्धारित अनिवार्य रिपोर्टिंग नियमों का पालन किया था।

रिपोर्टिंग और रोकथाम पर भी उठे सवाल

मामला केवल सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक या हानिकारक कंटेंट की मौजूदगी तक सीमित नहीं है। जांच में यह भी महत्वपूर्ण सवाल सामने आया है कि ऐसे कंटेंट की पहचान होने के बाद प्लेटफॉर्म ने उसे रोकने, हटाने और संबंधित एजेंसियों को रिपोर्ट करने के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का कितना पालन किया।

सरकार और संबंधित संस्थाओं की कार्रवाई के बाद अब बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और निगरानी पर विशेष जोर दिया जा रहा है।