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4 महीने में 22 मौत की सजा, जज रवि कुमार दिवाकर से 97 केस वापस

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admin
20 अगस्त 2026 को 10:09 am बजे
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उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में न्यायिक व्यवस्था से जुड़ा एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। हत्या और अन्य जघन्य अपराधों से जुड़े 97 लंबित मामलों की फाइलें अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत से वापस लेकर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में भेजी गई हैं।

यह कार्रवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश बीरेंद्र कुमार सिंह के आदेश पर की गई है। आदेश के मुताबिक, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 में लंबित मामलों को वापस जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में भेजा गया है, जहां उनका कानून के अनुसार निस्तारण किया जाएगा।

4 महीने में 10 मामलों में 22 मौत की सजाएं

यह फैसला ऐसे समय सामने आया है जब जज रवि कुमार दिवाकर के हालिया फैसले चर्चा में हैं। मुजफ्फरनगर में करीब चार महीनों के दौरान उन्होंने 10 मामलों में 22 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया।

इसके साथ ही उनके न्यायिक करियर में अब तक सुनाई गई मृत्युदंड की कुल संख्या 35 हो गई है। इनमें 13 मौत की सजाएं उनके बरेली में कार्यकाल के दौरान सुनाई गई थीं।

हालांकि, कानून के मुताबिक किसी भी मृत्युदंड को तब तक लागू नहीं किया जा सकता, जब तक संबंधित हाईकोर्ट उसकी पुष्टि नहीं कर देता।

6 अप्रैल से शुरू हुआ मौत की सजाओं का सिलसिला

मुजफ्फरनगर में जज दिवाकर के मृत्युदंड संबंधी फैसलों की शुरुआत 6 अप्रैल से हुई। अधिवक्ता समीर सैफी हत्याकांड में तीन दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई।

इसके बाद 28 अप्रैल को एक महिला और उसके तीन बेटों समेत परिवार के चार सदस्यों की हत्या के मामले में चार दोषियों को मृत्युदंड दिया गया।

इसके बाद भी मृत्युदंड के फैसलों का सिलसिला जारी रहा।

30 मई: एक दोषी को मृत्युदंड

20 जून: दो दोषियों को मौत की सजा

2 जुलाई: एक दोषी को मृत्युदंड

6 जुलाई: दो दोषियों को मौत की सजा

17 जुलाई: चार दोषियों को मृत्युदंड

12 अगस्त: एक दोषी को मौत की सजा

13 अगस्त: चार दोषियों को मृत्युदंड

इन फैसलों के चलते रवि कुमार दिवाकर न्यायिक हलकों में चर्चा में आ गए।

ज्ञानवापी सर्वे के आदेश से भी सुर्खियों में आए थे

46 वर्षीय रवि कुमार दिवाकर वर्ष 2022 में उस समय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे, जब वाराणसी में सिविल जज के पद पर रहते हुए उन्होंने ज्ञानवापी परिसर के वीडियोग्राफिक सर्वे का आदेश दिया था।

सर्वे में वजूखाने का क्षेत्र भी शामिल था। वहां मिली एक संरचना को लेकर हिंदू पक्ष ने शिवलिंग होने का दावा किया था, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इस दावे का विरोध किया था।

बाद में संबंधित क्षेत्र को सील कर दिया गया और सुप्रीम कोर्ट ने मामले की कार्यवाही वाराणसी के जिला न्यायाधीश को स्थानांतरित कर दी थी।

कई जिलों में रह चुकी है तैनाती

रवि कुमार दिवाकर ने उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में मुंसिफ/सिविल जज जूनियर डिवीजन के रूप में अपने न्यायिक करियर की शुरुआत की थी। उनकी तैनाती आजमगढ़, सुल्तानपुर, बदायूं, वाराणसी, बरेली और चित्रकूट समेत कई जिलों में रही है।

वह 29 नवंबर 2025 को मुजफ्फरनगर में तैनात हुए थे।

97 केस वापस लिए जाने से उठे सवाल

अब जघन्य अपराधों से जुड़े 97 लंबित मामलों की फाइलें उनकी अदालत से वापस लिए जाने के बाद यह मामला न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

अदालती आदेश में इन मामलों को वापस लेने का आधार लंबित प्रकरणों का कानून के अनुसार निस्तारण बताया गया है। हालांकि, जज दिवाकर द्वारा कुछ ही महीनों में बड़ी संख्या में मृत्युदंड के फैसले सुनाए जाने और इसके बाद 97 केसों की फाइलें वापस लिए जाने के घटनाक्रम ने इस मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है।

फिलहाल, आदेश में इन मामलों को वापस लेने के पीछे मृत्युदंड के फैसलों को कारण बताए जाने की बात सामने नहीं आई है।