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दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन के बाद ACP मनस्वी वशिष्ठ सस्पेंड

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admin
3 नवंबर 2026 | 10:17 am IST
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दिल्ली पुलिस बल के भीतर वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हुए विवाद के बाद तनाव बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को दिल्ली पुलिस के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया गया। उन पर यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों का नेतृत्व करने के बाद की गई है।

मुख्यालय के बाहर हुए इस विरोध-प्रदर्शन में करीब 100 से 150 पुलिसकर्मी शामिल हुए। इनमें बड़ी संख्या में महिला पुलिस अधिकारी भी मौजूद थीं। यह पूरा मामला शाहदरा पुलिस स्टेशन में पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच हुए टकराव के बाद शुरू हुआ। विवाद के बाद ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा के तत्कालीन थाना प्रभारी (SHO) अरुण कुमार का तबादला कर दिया गया था, जिससे पुलिसकर्मियों में नाराजगी फैल गई।

प्रदर्शन के दौरान ACP वशिष्ठ ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने अपनी चिंताएं पुलिस कमिश्नर तक पहुंचाई थीं। एक बैठक में उन्होंने पांच प्रमुख मांगें रखीं। वशिष्ठ के मुताबिक, पुलिस कमिश्नर ने बैठक के लिए समय दिया और उनकी बातें सुनीं। हालांकि, सभी को अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं मिला, लेकिन पांच प्रमुख मांगें अधिकारियों तक पहुंचा दी गईं।

पुलिसकर्मियों की प्रमुख मांगें क्या थीं?

प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों ने ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा के पूर्व SHO अरुण कुमार के तबादले रद्द करने की मांग की। उनका कहना था कि दोनों अधिकारियों को उनके पुराने पदों पर वापस बहाल किया जाए।

इसके अलावा पुलिसकर्मियों ने कई अन्य मांगें भी रखीं:

तबादले रद्द करने की मांग: ACP मनस्वी वशिष्ठ और पूर्व SHO अरुण कुमार को पुराने पदों पर बहाल किया जाए।

SOP बनाने की मांग: अदालत परिसर और पुलिस थानों में पुलिसकर्मियों तथा वकीलों के बीच होने वाले विवादों से निपटने के लिए स्पष्ट स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाया जाए।

अनुशासनात्मक कार्रवाई न हो: प्रदर्शन में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाए।

पुलिसकर्मियों के हितों की सुरक्षा: विवादों के दौरान पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।

23 अक्टूबर को शाहदरा थाने से शुरू हुआ था विवाद

पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस स्टेशन में हुई थी। इस दौरान वकील ललित बंसल के सिर में चोट लग गई थी। घटना के बाद वकीलों ने ACP मनस्वी वशिष्ठ पर रिवॉल्वर दिखाकर धमकाने का आरोप लगाया और अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी।

मामले ने तूल पकड़ा तो 28 अक्टूबर को ACP वशिष्ठ को गांधी नगर के सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर (SDPO) के पद से हटाकर स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर विमेन एंड चिल्ड्रन (SPUWAC) में स्थानांतरित कर दिया गया। वहीं, शाहदरा के SHO अरुण कुमार का तबादला सिक्योरिटी ब्रांच में कर दिया गया। इन तबादलों के बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली।

तबादलों से नाराज पुलिसकर्मियों ने किया प्रदर्शन

ACP और SHO के तबादले से पुलिसकर्मियों में नाराजगी बढ़ गई। प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों का तर्क था कि वकीलों के दबाव में अधिकारियों का तबादला करना उचित नहीं है। उनका मानना था कि इस तरह की कार्रवाई से पुलिस बल का मनोबल प्रभावित हो सकता है।

प्रदर्शन की सूचना मिलने पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों से अनुशासन बनाए रखने की अपील की। साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियों को सलाह दी कि वे सड़कों पर विरोध करने के बजाय पुलिस मुख्यालय के भीतर बातचीत के माध्यम से अपनी समस्याओं का समाधान निकालें।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच ACP मनस्वी वशिष्ठ का निलंबन दिल्ली पुलिस के भीतर चल रहे विवाद को एक नया प्रशासनिक मोड़ देता है।