केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को हरियाणा के अंबाला छावनी में ‘आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक’ का उद्घाटन किया। यह स्मारक 1857 में ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ने वाले वीर सैनिकों और स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित है। इस अवसर पर शाह ने ब्रिटिश औपनिवेशिक सोच और वामपंथी विचारधारा से प्रभावित इतिहासकारों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि 1857 की घटनाओं को केवल ‘विद्रोह’ कहना सही नहीं है, बल्कि यह भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम था।
1857 को विद्रोह नहीं, स्वतंत्रता संग्राम बताया
अपने संबोधन में अमित शाह ने वीर सावरकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘विद्रोह’ शब्द अंग्रेजों के नजरिए को दर्शाता है, जबकि भारतीयों के लिए 1857 की लड़ाई स्वतंत्रता संग्राम थी। उन्होंने कहा कि अंबाला की यह धरती ऐतिहासिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, जहां 10 मई 1857 को स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत हुई थी।
शाह ने कहा कि यह वह संघर्ष था, जिसने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी थी। जिस साम्राज्य के बारे में कहा जाता था कि वहां कभी सूरज नहीं डूबता, उसे भारतीयों के संघर्ष और बलिदान ने चुनौती दी। 1857 से 1947 तक चले 90 वर्षों के संघर्ष में अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राण न्योछावर किए।
उन्होंने कहा कि इन वीरों के बलिदान की बदौलत आज भारत एक मजबूत लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में दुनिया के सामने खड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने की नींव भी इन्हीं स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और संघर्ष में निहित है।
बाबू कुंवर सिंह के साहस को किया याद
अमित शाह ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के महान योद्धा बाबू कुंवर सिंह के अदम्य साहस को याद किया। उन्होंने कहा कि 87 वर्ष की उम्र में भी कुंवर सिंह ने ब्रिटिश सेना का डटकर मुकाबला किया था।
शाह के मुताबिक, युद्ध के दौरान जब उनके बाएं हाथ में गोली लगी, तो उन्होंने अपने दाहिने हाथ से घायल हिस्से को काटकर अलग कर दिया और संघर्ष जारी रखा। अंततः उन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। शाह ने कहा कि बाबू कुंवर सिंह का साहस भारत के स्वतंत्रता संग्राम में मौजूद त्याग और समर्पण की भावना का प्रतीक है।
लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे समेत कई वीरों को दी श्रद्धांजलि
गृह मंत्री ने अपने संबोधन में नाना साहेब पेशवा, महारानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, अजीमुल्ला खान, बेगम हजरत महल और बहादुर शाह जफर सहित 1857 के अन्य महान योद्धाओं को श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने कहा कि जो राष्ट्र अपनी स्वतंत्रता की कीमत नहीं समझता और उसके लिए बलिदान देने वालों का सम्मान नहीं करता, वह स्थायी प्रगति नहीं कर सकता। शहीदों की गाथाओं को देश के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके संघर्ष और बलिदान से प्रेरणा ले सकें।
युवाओं के लिए देशभक्ति का प्रेरणा केंद्र बनेगा स्मारक
अमित शाह ने विश्वास जताया कि ‘आजादी की पहली लड़ाई (1857) का शहीद स्मारक’ देशभर के युवाओं के लिए देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम का बड़ा प्रेरणा केंद्र बनेगा।
करीब 22 एकड़ में फैले इस स्मारक में 22 गैलरियां बनाई गई हैं। इनके माध्यम से 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं, वीर योद्धाओं और उनके बलिदानों को प्रदर्शित किया गया है। इसका उद्देश्य देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले वीरों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
1,260 करोड़ की हाईवे परियोजना का भी उद्घाटन
शहीद स्मारक के उद्घाटन के साथ ही अमित शाह ने 1,260 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 23 किलोमीटर लंबी जलबेहरा-शाहबाद राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना (NH-152G) का भी उद्घाटन किया। इस परियोजना से क्षेत्र में सड़क संपर्क और आवागमन की सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।







