नई दिल्ली: पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश को 31 दिसंबर 2029 तक नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया। राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों की समस्या देश के विकास में बाधा बन सकती है और अर्थव्यवस्था पर भी भारी बोझ डालती है। उन्होंने सभी राज्यों की पुलिस और संबंधित एजेंसियों से इस चुनौती के खिलाफ मिलकर अभियान चलाने का आह्वान किया।
नशे के खिलाफ एकीकृत अभियान चलाने का संकल्प
अमित शाह ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वर्ष 2026 के शेष समय और 2027, 2028 तथा 2029 के दौरान नशीले पदार्थों के खिलाफ व्यापक और एकीकृत अभियान चलाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य 31 दिसंबर 2029 तक देश को नशा मुक्त बनाने की दिशा में निर्णायक प्रगति करना है।
गृह मंत्री ने जोर दिया कि नशीले पदार्थों की समस्या से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। पुलिस, सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन को साझा रणनीति के तहत काम करना होगा।
शहीद पुलिसकर्मियों को दी श्रद्धांजलि
पुलिस स्मृति दिवस पर अमित शाह ने उन पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों ने कठिन परिस्थितियों में साहस, अनुशासन और संयम का परिचय देते हुए देश की सुरक्षा को मजबूत किया है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2018 में राष्ट्रीय पुलिस स्मारक के उद्घाटन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्मारक देश के लिए बलिदान देने वाले पुलिसकर्मियों के योगदान और वीरता की याद दिलाता है।
नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई का किया उल्लेख
गृह मंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और राज्य पुलिस के जवानों ने देश में लोकतंत्र की रक्षा करने तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
शाह ने कहा कि नक्सलवाद कई राज्यों में दशकों से आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ था। उन्होंने इस समस्या को समाप्त करने की दिशा में सुरक्षा बलों के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।
कश्मीर और पूर्वोत्तर में सुरक्षा स्थिति पर बोले शाह
अमित शाह ने कहा कि कश्मीर, पूर्वोत्तर और नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्र लंबे समय तक देश की आंतरिक सुरक्षा के प्रमुख चुनौतीपूर्ण क्षेत्र रहे हैं। उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में इन क्षेत्रों में सुरक्षा और शांति की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
उन्होंने कश्मीर में आतंकवाद पर नियंत्रण के प्रयासों, पूर्वोत्तर में शांति समझौतों और हथियार छोड़ने वाले लोगों का उल्लेख किया। शाह ने कहा कि पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने इन क्षेत्रों में स्थिरता लाने में अहम योगदान दिया है।
चुनावों में सुरक्षा बलों की भूमिका की सराहना
गृह मंत्री ने चुनावों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और राज्य पुलिस की भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि चुनाव संबंधी हिंसा पर अंकुश लगाने में सुरक्षा बलों का योगदान महत्वपूर्ण रहा है।
उन्होंने कहा कि पुलिस और सुरक्षा बलों की सतर्कता से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने में मदद मिलती है।
जवानों के बलिदान से मिली देश को मजबूती
अमित शाह ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारत ने वैश्विक मंच पर महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया है। इस उपलब्धि में देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों के बलिदान का बड़ा योगदान है।
उन्होंने कहा कि देश के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिसकर्मी और सुरक्षा बल कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं। उनके साहस और समर्पण से देश की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती है।
पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर गृह मंत्री ने शहीद जवानों के योगदान को याद करते हुए देश की सुरक्षा और नशे के खिलाफ अभियान में सभी एजेंसियों के सामूहिक प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।







