बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता कुलभूषण खरबंदा आज यानी 21 अक्टूबर को अपना 82वां जन्मदिन मना रहे हैं। उन्होंने अपने लंबे फिल्मी करियर में कभी सहायक अभिनेता, तो कभी खलनायक के रूप में दर्शकों का दिल जीता। कुलभूषण ने जिस भी किरदार को निभाया, उसमें अपने अभिनय से जान डाल दी। फिल्म ‘शान’ के खूंखार विलेन शाकाल से लेकर वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ के सत्यानंद त्रिपाठी यानी बाऊजी तक, उनके कई किरदार आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं। आइए, उनके जन्मदिन पर जानते हैं उनके जीवन और फिल्मी सफर से जुड़ी कुछ खास बातें।
जन्म और परिवार
कुलभूषण खरबंदा का जन्म 21 अक्टूबर 1944 को पंजाब में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पंजाब में पूरी की और इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से पढ़ाई की। कॉलेज के दिनों से ही उनकी दिलचस्पी अभिनय में थी। वह नाटकों में हिस्सा लेते थे और धीरे-धीरे थिएटर की दुनिया में अपनी पहचान बनाने लगे।
पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर ‘अभियान’ नाम से थिएटर समूह शुरू किया। फिल्मों में कदम रखने से पहले उन्होंने लंबे समय तक रंगमंच पर काम किया। थिएटर के इसी अनुभव ने उनके अभिनय को गंभीरता और गहराई दी।
थिएटर से बॉलीवुड तक का सफर
कुलभूषण खरबंदा ने वर्ष 1974 में फिल्म ‘जादू का शंख’ से बड़े पर्दे पर कदम रखा। इसके बाद वह श्याम बेनेगल की फिल्म ‘निशांत’ में नजर आए। समानांतर सिनेमा से जुड़ी फिल्मों में उनके अभिनय को सराहना मिली।
उन्होंने ‘भूमिका’, ‘अर्थ’, ‘कलयुग’, ‘मैं जिंदा हूं’ और ‘नसीब’ जैसी फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। उनकी खासियत रही कि उन्होंने सीमित संवादों के बावजूद अपने हाव-भाव और सहज अभिनय से किरदारों को प्रभावशाली बनाया। उन्होंने अपने करियर में सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों तरह की भूमिकाओं में अपनी प्रतिभा साबित की।
फिल्म ‘शान’ में शाकाल बनकर छाए
कुलभूषण खरबंदा के करियर का सबसे यादगार किरदार फिल्म ‘शान’ का शाकाल माना जाता है। वर्ष 1980 में रिलीज हुई इस फिल्म में उन्होंने एक ऐसे खलनायक की भूमिका निभाई, जिसकी अलग शैली और रहस्यमयी व्यक्तित्व ने दर्शकों का ध्यान खींचा।
फिल्म में उनके साथ अमिताभ बच्चन, शशि कपूर और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे बड़े सितारे नजर आए थे। शाकाल के किरदार ने कुलभूषण खरबंदा को व्यापक पहचान दिलाई। आज भी हिंदी सिनेमा के यादगार खलनायकों की चर्चा में उनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
‘मिर्जापुर’ में बाऊजी बनकर फिर बटोरी चर्चा
बड़े पर्दे पर अपनी छाप छोड़ने के बाद कुलभूषण खरबंदा ने ओटीटी की दुनिया में भी दर्शकों का ध्यान खींचा। लोकप्रिय वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ में उन्होंने सत्यानंद त्रिपाठी उर्फ बाऊजी का किरदार निभाया।
इस भूमिका में उनका सख्त व्यक्तित्व, संवाद अदायगी और प्रभावशाली अभिनय देखने को मिला। बाऊजी के किरदार ने नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी उन्हें लोकप्रिय बनाया। इस तरह उन्होंने साबित किया कि अनुभवी कलाकार बदलते दौर और मनोरंजन के नए माध्यमों में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा सकते हैं।
निजी जीवन और परिवार
कुलभूषण खरबंदा के निजी जीवन की बात करें तो उन्होंने माहेश्वरी देवी से विवाह किया। माहेश्वरी का संबंध राजस्थान के प्रतापगढ़ के शाही परिवार से बताया जाता है। दोनों की एक बेटी श्रुति खरबंदा हैं।
कुलभूषण खरबंदा ने अपने अभिनय करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन अपने काम के प्रति समर्पण बनाए रखा। थिएटर से शुरू हुआ उनका सफर हिंदी सिनेमा और ओटीटी तक पहुंचा। ‘शाकाल’ और ‘बाऊजी’ जैसे यादगार किरदारों के जरिए उन्होंने अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है।







