देश में एथनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी E-20 को लेकर जारी बहस के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बार फिर इसका बचाव किया है। बिहार दौरे पर पहुंचे गडकरी से सवाल किया गया कि क्या पेट्रोल में एथनॉल मिलाने से वाहनों को नुकसान पहुंच रहा है? इस पर उन्होंने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि एथनॉल मिश्रित पेट्रोल से वाहनों को नुकसान होने की बात तथ्यों पर आधारित नहीं है।
पटना में एथनॉल विवाद पर क्या बोले गडकरी?
नितिन गडकरी 1 अक्टूबर को पटना में आयोजित ‘बिहार इन्वेस्टर समिट 2026: द इमर्जिंग इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन ऑफ इंडिया’ के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए थे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि देश की प्रमुख वाहन कंपनियां एथनॉल आधारित ईंधन पर वाहनों का परीक्षण कर चुकी हैं और उनके मुताबिक अब तक इससे संबंधित कोई शिकायत सामने नहीं आई है।
गडकरी ने कहा कि संबंधित विभाग का मंत्री होने के नाते उन्हें इसकी जानकारी है और प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां 100 प्रतिशत एथनॉल पर चलने वाली तकनीक का भी परीक्षण कर चुकी हैं। उन्होंने एथनॉल से वाहनों के खराब होने के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी वाहन को इससे नुकसान हुआ है, तो उसका उदाहरण सामने रखा जाना चाहिए।
4 करोड़ चार-पहिया और 20 करोड़ दोपहिया वाहनों का दिया आंकड़ा
गडकरी ने दावा किया कि वर्ष 2022 से करीब 4 करोड़ चार-पहिया और 20 करोड़ दोपहिया वाहन एथनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने इसे एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम की उपयोगिता के पक्ष में उदाहरण के रूप में पेश किया।
हालांकि, वाहन की अनुकूलता मॉडल, निर्माण वर्ष और निर्माता की तकनीकी विशिष्टताओं पर निर्भर कर सकती है। इसलिए वाहन मालिकों के लिए अपने वाहन निर्माता की ईंधन संबंधी सिफारिशों का पालन करना महत्वपूर्ण है।
किसानों को ‘अन्नदाता’ से ‘ऊर्जादाता’ बनाने पर जोर
गडकरी ने कहा कि एथनॉल नीति का उद्देश्य केवल पेट्रोल में वैकल्पिक ईंधन मिलाना नहीं है, बल्कि कृषि क्षेत्र को ऊर्जा अर्थव्यवस्था से जोड़ना भी है।
उनके मुताबिक मक्का, गन्ना और अन्य कृषि उत्पादों से एथनॉल उत्पादन बढ़ने से किसानों के लिए आय के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में किसान केवल ‘अन्नदाता’ ही नहीं बल्कि ‘ऊर्जादाता’ की भूमिका भी निभा सकते हैं।
गडकरी ने दावा किया कि मक्के से एथनॉल उत्पादन को बढ़ावा मिलने के कारण बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के किसानों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ हुआ है। उन्होंने इस नीति को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और वैकल्पिक ऊर्जा से जोड़कर देखने की बात कही।
ईंधन आयात पर निर्भरता घटाने की कोशिश
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम और अन्य पारंपरिक ईंधनों का आयात करता है। उनके अनुसार देश का पेट्रोलियम आयात बिल करीब 22 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचता है।
गडकरी का कहना है कि एथनॉल, बायोफ्यूल, हाइड्रोजन और अन्य घरेलू वैकल्पिक ईंधनों का उत्पादन बढ़ने से भारत की आयातित पेट्रोलियम पर निर्भरता कम की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना केवल परिवहन क्षेत्र का विषय नहीं है, बल्कि इससे कृषि, ऊर्जा, पर्यावरण और ग्रामीण रोजगार भी जुड़े हुए हैं।
धान की भूसी से विमान ईंधन बनाने पर भी काम
भविष्य के ईंधन विकल्पों का जिक्र करते हुए गडकरी ने कहा कि देश में नई तकनीकों और जैव ईंधन पर लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने धान के अवशेष और अन्य कृषि अपशिष्ट से ईंधन तैयार करने की संभावनाओं का भी उल्लेख किया।
उनका कहना था कि भविष्य नवाचार, तकनीक और अनुसंधान का है और बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्यों के लिए इसमें बड़े अवसर मौजूद हैं।
बिहार में मखाना और पर्यटन में निवेश की संभावना
गडकरी ने बिहार की निवेश संभावनाओं का जिक्र करते हुए कृषि आधारित उद्योग, पर्यटन और स्थानीय उत्पादों को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने मखाने का उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार में बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन होता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसकी मांग है। ऐसे स्थानीय उत्पादों की प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और निर्यात से राज्य में रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
बिहार इन्वेस्टर समिट में राज्य सरकार ने भी उद्योगपतियों और उद्यमियों को बिहार में निवेश के लिए आमंत्रित किया। समिट की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य निवेशकों, उद्योग जगत और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाकर राज्य के औद्योगिक विकास को गति देना है।







