दिल्ली में इस साल दशहरे पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के साथ 30 फुट ऊंचे कॉकरोच का पुतला भी जलाया जाएगा। श्री केशव रामलीला समिति ने यह फैसला गंदगी के खिलाफ जागरूकता फैलाने और स्वच्छता का संदेश देने के उद्देश्य से लिया है। समिति के अध्यक्ष और मॉडल टाउन से भाजपा विधायक अशोक गोयल देवराहा के मुताबिक, कॉकरोच को गंदगी का प्रतीक मानते हुए उसके पुतले का दहन किया जाएगा।
बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश
अशोक गोयल देवराहा ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि विजयादशमी असत्य पर सत्य, बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है। परंपरागत रूप से इस दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं, जो यह संदेश देते हैं कि अंत में सत्य की ही जीत होती है।
उन्होंने बताया कि समिति पिछले कुछ वर्षों से देश और समाज को प्रभावित करने वाले मुद्दों को सामने लाने के लिए भी प्रतीकात्मक पुतलों का दहन करती रही है। इससे पहले नक्सलवाद और आतंकवाद जैसी समस्याओं को दर्शाने वाले पुतले भी जलाए गए हैं।
घर से समाज तक स्वच्छता पर जोर
समिति इस बार नॉर्थ वेस्ट दिल्ली के एनएसपी स्थित केशव रामलीला मैदान में कॉकरोच का पुतला जलाएगी। आयोजकों का कहना है कि इसका उद्देश्य तीन स्तरों पर स्वच्छता की जरूरत को रेखांकित करना है—घर, आसपास का वातावरण और पूरा समाज।
अशोक गोयल ने स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं लिया गया है। उनके अनुसार, रावण की सेना में असुरों के बीच कॉकरोच के पुतले को शामिल करने से बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश और मजबूत होगा।
CJP के विरोध-प्रदर्शनों के बीच आया फैसला
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रही है। संगठन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्षी दलों और छात्र संगठनों के साथ आवाज उठा रहा है।
CJP इससे पहले पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ भी प्रदर्शन कर चुकी है। संगठन के दो नेताओं को तिहाड़ जेल भेजे जाने के बाद इसके संस्थापक अभिजीत दिपके ने लोगों से 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में राष्ट्रीय ध्वज के साथ जुटने की अपील की है।
हालांकि, रामलीला समिति ने कॉकरोच के पुतले के दहन को स्वच्छता से जुड़ा कदम बताया है और इसे राजनीतिक विरोध से अलग रखा है।







