मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को देशव्यापी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर विपक्ष की आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को लखनऊ में कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन INDIA पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष देश में अराजकता फैलाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजनाथ सिंह ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा के उस कथित बयान का जिक्र किया, जिसमें प्रदर्शनकारियों के बांग्लादेश में हुए विरोध-प्रदर्शनों से प्रेरित होने की बात कही गई थी। राजनाथ ने इसे लेकर विपक्ष पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि वह युवाओं की ऊर्जा का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए करना चाहता है।
राहुल गांधी पर राजनाथ सिंह का निशाना
रक्षा मंत्री ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि संविधान की प्रति साथ रखने वाले नेताओं को लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “लोकतंत्र का मतलब अराजकता फैलाना, संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कम करना या भारत की विकास यात्रा में बाधा डालना नहीं है।”
राजनाथ सिंह ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानून का सम्मान करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को राजनीतिक स्वार्थ की भेंट नहीं चढ़ाया जाना चाहिए।
बांग्लादेश के विरोध-प्रदर्शनों का भी किया जिक्र
राजनाथ सिंह ने जुलाई 2024 में बांग्लादेश में हुए व्यापक विरोध-प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि भारत में भी विपक्षी दल इसी तरह की परिस्थितियां पैदा करना चाहते हैं। उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर युवाओं को आंदोलन के जरिए अराजकता की ओर ले जाने का आरोप लगाया।
हालांकि, ये आरोप रक्षा मंत्री के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। इन्हें विपक्ष की मंशा के स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
आपातकाल और 1984 के दंगों को लेकर कांग्रेस पर हमला
रक्षा मंत्री ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल को “अक्षम्य अपराध” बताया। उन्होंने 1984 के सिख-विरोधी दंगों का भी उल्लेख किया और कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए।
इसके अलावा, उन्होंने 1990 के राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपनी सरकार बचाने के लिए ऐसे लोगों का समर्थन किया, जिन पर रामभक्तों और कारसेवकों के खिलाफ हिंसा के आरोप थे।
चुनाव आयोग की नियुक्तियों और SIR पर भी उठाए सवाल
राजनाथ सिंह ने चुनाव आयोग से जुड़े पुराने घटनाक्रमों का हवाला देते हुए कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी की उस सिफारिश का भी उल्लेख किया, जिसमें चुनाव आयुक्त नवीन चावला को हटाने की बात कही गई थी।
रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठा रही है, जबकि उसके अपने कार्यकाल में चुनाव आयोग की नियुक्तियों और कामकाज को लेकर विवाद रहे हैं।
लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर बहस
SIR अभियान और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच राजनाथ सिंह के बयान ने चुनाव आयोग की भूमिका, विपक्ष के विरोध-प्रदर्शनों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर बहस को फिर तेज कर दिया है।
भाजपा जहां विपक्ष पर संस्थाओं को कमजोर करने और अराजकता फैलाने का आरोप लगा रही है, वहीं SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियां मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनाव प्रक्रिया से संबंधित हैं। इस विवाद के केंद्र में चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक जवाबदेही के सवाल बने हुए हैं।







