भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता, बुद्धि और सिद्धि के दाता के रूप में पूजा जाता है। यह सुंदर भजन “गौरी पुत्र गणेश जी, मेरे घर पधारो” भक्तों द्वारा गणेश पूजा, गणेश चतुर्थी, कीर्तन और अन्य धार्मिक आयोजनों में श्रद्धापूर्वक गाया जाता है। आप भी गणपति बप्पा की आराधना के समय इस भजन का पाठ या श्रवण कर सकते हैं।
गणेश जी का भजन
गौरी पुत्र गणेश जी, मेरे घर पधारो
गौरी के पुत्र गणेश जी,
मेरे घर में पधारो ॥
दोहा
सदा भवानी दाहिनी,
सन्मुख रहे गणेश।
पाँच देव रक्षा करें,
ब्रह्मा विष्णु महेश॥
गणपति का आवाहन
गौरी के पुत्र गणेश जी,
मेरे घर में पधारो।
घर में पधारो,
कीर्तन में पधारो,
काटो सकल कलेश जी,
मेरे घर में पधारो॥
एकदंत गणेश की महिमा
एकदंत दयावंत चारभुजा धारी,
माथे सिंदूर सोहे, मूषक की सवारी।
हे सर्वसिद्धि सर्वेश जी,
मेरे घर में पधारो,
गौरी के पुत्र गणेश जी,
मेरे घर में पधारो॥
मोदकप्रिय गणपति की वंदना
मोदक प्रिय, मुद मंगलदाता,
विद्या वारिधि, बुद्धि विधाता।
हे गणपति, पुत्र उमेश जी,
मेरे घर में पधारो,
गौरी के पुत्र गणेश जी,
मेरे घर में पधारो॥
भक्त की प्रार्थना
शंकर सुवन, भवानी के नंदन,
चरण कमल पे शत-शत वंदन।
मेरे हृदय करो प्रवेश जी,
मेरे घर में पधारो,
गौरी के पुत्र गणेश जी,
मेरे घर में पधारो॥
समापन
गौरी के पुत्र गणेश जी,
मेरे घर में पधारो।
घर में पधारो,
कीर्तन में पधारो,
काटो सकल कलेश जी,
मेरे घर में पधारो॥







