प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि 2014 से पहले देश में ‘फोन बैंकिंग’ की व्यवस्था चलती थी, जिसका लाभ कुछ चुनिंदा लोगों को मिलता था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस से जुड़े नेताओं और सत्ता में प्रभावशाली लोगों के करीबी व्यक्तियों को इस व्यवस्था के जरिए हजारों करोड़ रुपये के बैंक लोन दिए जाते थे।
मोदी ओडिशा के जटनी स्थित इन्फोवैली-II में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन करने के बाद संबोधित कर रहे थे।
क्या थी कांग्रेस की ‘फोन बैंकिंग’ व्यवस्था?
प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान कुछ चुनिंदा लोगों को फोन के जरिए बैंकों से बड़े-बड़े कर्ज दिलाए जाते थे। इसके विपरीत, गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को बैंक खाता खोलने के लिए भी गारंटर की जरूरत पड़ती थी।
मोदी के अनुसार, इस व्यवस्था के कारण बैंकिंग प्रणाली में कुप्रबंधन बढ़ा और बैंकों को बड़ी मात्रा में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) यानी फंसे हुए कर्ज की समस्या का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे देश की बैंकिंग व्यवस्था गंभीर संकट की ओर बढ़ गई थी।
बैंक राष्ट्रीयकरण के बावजूद गरीब रहे बैंकिंग से दूर
प्रधानमंत्री ने कहा कि 1960 और 1970 के दशक में गरीबों की मदद के उद्देश्य से बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था। इसके बावजूद, उनके मुताबिक, वर्ष 2014 तक देश की आधी से अधिक आबादी बैंकिंग सुविधाओं से बाहर थी।
उन्होंने कहा कि उस समय मध्यम वर्ग के लिए बैंक लोन हासिल करना भी मुश्किल था। गरीबों, छोटे किसानों और भूमिहीन महिलाओं के लिए औपचारिक बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंचना और भी कठिन था।
DBT से सीधे खातों में पहुंच रहा सरकारी पैसा
प्रधानमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की उस टिप्पणी का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि दिल्ली से भेजे गए हर एक रुपये में से केवल 15 पैसे ही लाभार्थियों तक पहुंचते हैं।
मोदी ने कहा कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) व्यवस्था के जरिए अब सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 59 करोड़ से अधिक जन धन खातों के माध्यम से लोगों तक सरकारी लाभ पहुंचाने में मदद मिली है।
प्रधानमंत्री के अनुसार, इस व्यवस्था से कल्याणकारी योजनाओं में होने वाली गड़बड़ियों और बिचौलियों की भूमिका कम करने में मदद मिली है।
MUDRA और PM स्वनिधि से छोटे कारोबारियों को मदद
मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (MUDRA), पीएम स्वनिधि (PM SVANidhi) और पीएम विश्वकर्मा (PM Vishwakarma) जैसी योजनाओं के जरिए छोटे उद्यमियों, रेहड़ी-पटरी वालों और पारंपरिक कारीगरों तक औपचारिक ऋण की सुविधा पहुंचाई गई है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल बैंकिंग ने देश के लोगों को चौबीसों घंटे बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठाने का अवसर दिया है। इससे बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ी है और अधिक लोग औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जुड़ सके हैं।
गांवों और छोटे शहरों के विकास पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि NDA सरकार ने जनहित, सक्रिय प्रशासन और सुशासन पर आधारित विकास मॉडल अपनाया है। उन्होंने जोर दिया कि विकास का अर्थ केवल बड़े शहरों की प्रगति नहीं, बल्कि गांवों और छोटे शहरों को भी समान अवसर उपलब्ध कराना है।
मोदी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य दूर-दराज के क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी पहुंचाना और गरीब परिवारों को ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जिससे वे सम्मान के साथ जीवन जी सकें। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास की यात्रा में कोई भी नागरिक पीछे न छूटे।







