राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बाद गुरुग्राम जिला प्रशासन ने सख्त पाबंदियां लागू कर दी हैं। प्रदूषण पर काबू पाने के लिए जिले में 5 नवंबर से 20 नवंबर तक धूल उड़ाने वाले सभी प्रकार के निर्माण और तोड़फोड़ के कार्यों पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य किया गया है।
यह फैसला ‘कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट’ (CAQM) के दिशा-निर्देशों के तहत लिया गया है। डिप्टी कमिश्नर उत्तम सिंह ने मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किए। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि के दौरान सभी संबंधित संस्थानों को इन निर्देशों का पालन करना होगा।
5 से 20 नवंबर तक निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध
प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए गुरुग्राम में धूल पैदा करने वाले निर्माण और तोड़फोड़ के कार्यों पर रोक लगाई गई है। इसमें कई तरह की बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शामिल हैं।
प्रतिबंध के दायरे में आने वाले कार्यों में शामिल हैं:
राजमार्ग और सड़क निर्माण
फ्लाईओवर और ओवरब्रिज निर्माण
पाइपलाइन बिछाने का कार्य
अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जुड़े निर्माण और तोड़फोड़ के काम
प्रशासन का उद्देश्य निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल को कम करना और वायु गुणवत्ता में सुधार लाना है।
रेलवे, मेट्रो और अस्पतालों की परियोजनाओं को छूट
प्रशासन ने कुछ आवश्यक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजनाओं को निर्माण प्रतिबंध से छूट दी है। इन परियोजनाओं को जारी रखने की अनुमति इसलिए दी गई है, ताकि जरूरी सेवाओं और बुनियादी ढांचे के विकास में बाधा न आए।
छूट के दायरे में शामिल हैं:
रेलवे और मेट्रो परियोजनाएं
हवाई अड्डों से जुड़े निर्माण कार्य
अस्पताल और स्वास्थ्य सुविधाएं
जलापूर्ति और स्वच्छता प्रणालियां
राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित परियोजनाएं
औद्योगिक इकाइयां और आवश्यक सेवाएं
इन परियोजनाओं को छूट देने का उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं को सुचारू बनाए रखना है।
दफ्तरों में 50% कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य
गुरुग्राम में हरियाणा सरकार के विभागों और निजी कार्यालयों को अपने कर्मचारियों के लिए घर से काम करने की व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया गया है।
आदेश के अनुसार, किसी भी कार्यालय में 50 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी एक समय में उपस्थित नहीं हो सकेंगे। बाकी कर्मचारियों को घर से काम करना होगा।
कार्यालयों को कर्मचारियों की उपस्थिति के लिए रोस्टर तैयार करने और उसका रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है। इससे प्रशासन को यह जांचने में मदद मिलेगी कि संबंधित संस्थान नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं।
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण के दौरान लोगों की आवाजाही कम करना और सड़कों पर वाहनों की संख्या घटाना है।
रोजाना निरीक्षण, उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई
निर्माण प्रतिबंध और कार्यालयों में उपस्थिति के नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था भी सख्त कर दी है।
संबंधित उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को रोजाना निरीक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आदेशों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों और एजेंसियों के खिलाफ ‘कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट एक्ट, 2021’ के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गंभीर प्रदूषण से स्वास्थ्य पर खतरा, डॉ. रणदीप गुलेरिया ने दी चेतावनी
वायु गुणवत्ता में गिरावट के बीच गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनल मेडिसिन, रेस्पिरेटरी एंड स्लीप मेडिसिन के चेयरमैन डॉ. रणदीप गुलेरिया ने प्रदूषित हवा के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों को लेकर चिंता जताई है।
उन्होंने कहा कि जब वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ (Severe) और ‘बहुत गंभीर’ (Very Severe) श्रेणी में पहुंच जाती है, तो यह स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन जाती है। विशेष रूप से सांस और हृदय संबंधी पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों, छोटे बच्चों और बुजुर्गों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
डॉ. गुलेरिया के मुताबिक, प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ने पर अस्पतालों में सांस लेने में परेशानी और लगातार खांसी से जुड़े आपातकालीन मामलों में वृद्धि देखी जाती है। कुछ मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ सकता है, जबकि गंभीर स्थिति में आईसीयू में इलाज की आवश्यकता भी हो सकती है।
स्वस्थ लोगों को भी हो सकती हैं सांस संबंधी समस्याएं
डॉ. गुलेरिया ने बताया कि प्रदूषित हवा का असर केवल पहले से बीमार लोगों तक सीमित नहीं रहता। पूरी तरह स्वस्थ व्यक्ति भी अत्यधिक प्रदूषण के संपर्क में आने पर कई तरह की परेशानियों का सामना कर सकते हैं।
इनमें शामिल हैं:
सीने में जकड़न
सांस फूलना
लगातार खांसी
आंखों से पानी आना
प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, खासकर उन लोगों को जो पहले से सांस या हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
प्रदूषण फेफड़ों और दिल को कैसे प्रभावित करता है?
डॉ. गुलेरिया के अनुसार, प्रदूषक तत्वों के संपर्क में आने से फेफड़ों और रक्त वाहिकाओं में सूजन बढ़ सकती है। इससे क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), अस्थमा और हृदय रोग जैसी बीमारियां गंभीर हो सकती हैं।
पहले से सांस या दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों में प्रदूषण के कारण सांस फूलने की समस्या बढ़ सकती है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो सकता है।
इसलिए जब वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में पहुंच जाए, तो विशेष रूप से जोखिम वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
सर्दियों में गंगा के मैदानी इलाकों में क्यों बढ़ता है प्रदूषण?
डॉ. गुलेरिया ने बताया कि सर्दियों के दौरान भौगोलिक और मौसमी परिस्थितियां भी प्रदूषण को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं।
इंडो-गैंजेटिक प्लेन यानी गंगा के मैदानी इलाकों में सर्दियों के दौरान हवा की गति धीमी हो जाती है। इसके कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में फैलने के बजाय जमीन के करीब जमा रहने लगते हैं।
इस स्थिति में प्रदूषित हवा लंबे समय तक सतह के पास बनी रहती है, जिससे लोगों का हानिकारक प्रदूषकों के संपर्क में आने का खतरा बढ़ जाता है।
प्रदूषण के उत्सर्जन और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों का यह मेल सर्दियों में वायु गुणवत्ता को सुधारना चुनौतीपूर्ण बना देता है।







